बिहार (पटना):- ना इधर के रहे ना उधर के रहे!

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कार्यकारी संपादक पंकज कुमार ठाकुर की ✍️कलम से

कभी बीजेपी नेता योगी आदित्यनाथ ने चुनाव में हनुमान को दलित समुदाय का बताया था तो दलित नेता चिराग पासवान खुद को ही हनुमान बताते हैं. लेकिन हनुमान बने चिराग पासवान पर उनके राम कितनी कृपा बरसाएंगे, ऐसी कम ही उम्मीद है. पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के निधन से खाली हुई राज्य सभा की एक सीट पर चुनाव आयोग 14 दिसंबर को उपचुनाव होना है. पहली दावेदारी तो चिराग पासवान की ही बनती है, लेकिन राजनीतिक माहौल तो यही इशारा कर रहा है कि दूर दूर तक ऐसी कोई संभावना नहीं है.खासकर, बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद के बयान के बाद तो ऐसी आशंका कम ही लगती है.

चुनावी नतीजे के बाद जदयू चिराग पर हमलावर!

बिहार चुनाव के नतीजे आने के बाद तो जेडीयू नेता खुल कर आरोप लगाने लगे कि चिराग पासवान के चलते जदयू की सीटें कम आने के बाद बीजेपी पर दबाव बनाने की कोशिश में है कि एनडीए से चिराग पासवान का पत्ता साफ किया जाए. चिराग पासवान की नजर स्वाभाविक तौर पर मोदी कैबिनेट में अपने पिता की खाली पड़ी कुर्सी पर है, जो अपनी मां रीना पासवाव के लिए चाहते हैं. विधानसभा चुनाव में चिराग पासवान की पार्टी एलजेपी के प्रदर्शन ने काफी चोट पहुंचायी है और आगे भी लगता है चिराग पासवान को उसकी भरपाई के साथ साथ खामियाजा भी भुगतना पड़ सकता है.

एनडीए गठबंधन के सीएम का किया था विरोध!

कम से कम बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद के बयान से तो ऐसा ही लगता है. एक इंटरव्यू में केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद की चिराग पासवान की पार्टी के बारे में टिप्पणी रही, ‘एलजेपी, राष्ट्रीय पार्टी तो है नहीं. एक बिहार बेस्ड पार्टी है. चिराग ने बिहार में एनडीए गठबंधन के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का खुला विरोध किया

चिराग अपनी मां के लिए चाहते हैं सीट!

ये उन्हें तय करना है कि उनको आगे क्या करना है ?’ चिराग पासवान के अपने पिता की जगह मोदी कैबिनेट का हिस्सा बनने या एनडीए से बाहर किये जाने को लेकर बीजेपी नेता अभी पत्ते नहीं खोल रहे हैं. निश्चित तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ही इसका फैसला करेंगे.

जेपी नड्डा के समझाने के बाद भी नहीं माने चिराग!

जेपी नड्डा तो चिराग पासवान से कई बार मिल कर चुनाव लड़ने के संकेत दिये गये थे, लेकिन वे अपनी जिद पर कायम रहे. वहीं मोदी ने चिराग पासवान को लेकर सीधे सीधे कोई टिप्पणी करने से परहेज किया. वहीं अमित शाह ने भी बिहार एनडीए के सहयोगी दलों का नाम लेकर साफ कर दिया था कि चिराग पासवान तो नहीं हैं, लेकिन केंद्र में उनकी क्या भूमिका रहेगी इसको लेकर चुनाव बाद विचार करने की बात कही थी.

लोस चुनाव में एलजेपी के हिस्से में 6 सीटें!
लोक सभा चुनाव में भी चिराग पासवान कम से कम उतनी सीटें चाहते जितनी 2014 में उन्हें मिली थीं. जब बीजेपी और जेडीयू ने 17-17 सीटें बांट ली तो एलजेपी के हिस्से में 6 सीटें आई.बीजेपी ने ये कहते हुए राजी कर लिया कि बीजेपी कोटे की राज्य सभा की जो भी सीट पहले खाली होगी, राम विलास पासवान को राज्य सभा भेज दिया जाएगा और इस तरह एलजेपी सात की संख्या स्वीकार कर ली.

जेडीयू के बिना राज्य सभा जाना असंभव!
अब जबकि रविशंकर प्रसाद चुनाव जीत कर लोक सभा पहुंच गये तो राज्य सभा की उनकी सीट खाली हो गयी और बीजेपी ने वह सीट राम विलास पासवान को दे दी थी. रविशंकर प्रसाद की बातों से तो ऐसा लगता है जैसे बीजेपी चिराग पासवान को ये संदेश देने की कोशिश कर रही हो कि वो राज्य सभा की सीट तो भूल ही जाएं. चुनाव के दौरान जब चिराग पासवान नीतीश कुमार पर हमला बोल रहे, तो एक दिन नीतीश कुमार ने उन्हें याद दिलाया बगैर जेडीयू के सहयोग के राम विलास पासवान राज्य सभा जा पाते क्या?

बीजेपी के खाते में जाने की बन रही संभावना!

इसका मतलब साफ है राज्य सभा की उस सीट से लोक जनशक्ति का कोई प्रत्याशी चुनाव लड़ता है तो वो उसका समर्थन नहीं करने वाली है. जेडीयू की सीटें विधानसभा में भले ही कम हो गयी हैं, लेकिन उसके बगैर राज्य सभा की वो सीट कोई अकेले जीत पाएगा. जो नये समीकरण बन रहे हैं, लगता है फिर से ये सीट बीजेपी के खाते में चली जाने की संभावना बन रही है.

चिराग से नाराज हैं जदयू के कई नेता!

जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष अशोक चौधरी और अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह के अलावा कई नेताओं का कहना है बिहार चुनाव में चिराग पासवान ने जो हाल किया है, एलजेपी को एनडीए में रहने का कोई हक नहीं है. कैसे चिराग पासवान के कारण बीजेपी भागलपुर सीट हार गयी और जेडीयू को तो कई सीटों का नुकसान हुआ. भाजपा नेतृत्व को यह बार-बार याद दिलाया जाता है. बीजेपी भागलपुर की सीट नहीं हारती तो विधानसभा सीटों के मामले में आरजेडी से पिछड़ना नहीं पड़ता.

बीजेपी के लिए चिराग और नीतीश दोनों अहम!

बीजेपी बिहार में जो हासिल करना चाहती है उसमें नीतीश कुमार और चिराग पासवान के साथ होने से बहुत फायदा भले न हो, लेकिन दोनों में से किसी एक के भी न होने से ज्यादा नुकसान हो सकता है. बिहार के दलित वोटों में से करीब पांच फीसदी पासवान वोट हैं. इस बार ये 32 फीसदी वोट एलजेपी को मिले हैं, 17 फीसदी एनडीए को और 22 फीसदी महागठबंधन को मिले हैं.

छिटक सकता है अति पिछड़ों का वोट बैंक!

चिराग पासवान और नीतीश कुमार दोनों में से किसी एक को चुनना हो तो बीजेपी चिराग पासवान को कम ही महत्व देगी. नीतीश कुमार के साथ सुशासन बाबू का तमगा ही नहीं, अति पिछड़ों को एक खास वोट बैंक भी है जिस पर देर सबेर बीजेपी काबिज होना चाहती है. नीतीश कुमार को नाराज कर या एनडीए से छिटक जाने की स्थिति में तो बीजेपी को पूरी तरह हाथ धोना पड़ेगा.

हनुमान बने चिराग पासवान पर कितना मेहरवान होंगे प्रधानमंत्री मोदी राम 2
जेडीयू की पहली पसंद सुशील मोदी!

बीजेपी कोटे से भी फिलहाल कम से कम दो नाम चर्चा में जरूर हैं – सुशील कुमार मोदी और सैयद शाहनवाज हुसैन. सुशील मोदी को डिप्टी सीएम न बनाये जाने के बाद केंद्र में ले जाये जाने की चर्चा रही. राज्य सभा की सीट इसमें मददगार और माध्यम बन सकती है. फिलहाल सुशील मोदी को आचार समिति का अध्यक्ष बनाया गया है. शाहनवाज हुसैन को 2019 में भी टिकट से इसलिए वंचित होना पड़ा क्योंकि वो सीट जेडीयू के खाते में चली गयी.

कम से कम 122 वोटों की आवश्यकता!

243 सीटों वाली विधानसभा में कामयाबी उसे ही मिल पाएगी जिसके नाम पर प्रथम वरीयता के कम से कम 122 वोट हों. मौजूदा विधानसभा में एनडीए के 125 विधायक चुन कर आये हैं. मान कर चलना चाहिये कि राज्य सभा का चुनाव भी वही जीत सकेगा जिसे किसी एक या दो नहीं बल्कि एनडीए के सभी दलों का सपोर्ट मिलेगा. इस लिहाज से सुशील मोदी ही ऐसे नेता हैं जिनको समर्थन देने के लिए जेडीयू भी सहर्ष तैयार हो जाएगी.

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