गिरिडीह(झारखंड):- जमुआ में भारत बंद का रहा मिला जुला असर!

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रिपोर्ट:विलियम जेकब

किसानों और विभिन्न विपक्षी दलों के आह्वान पर मंगलवार को जमुआ में भारत बंद शांतिपूर्ण रहा। जमुआ चौक पर मंगलवार अहले सुबह से ही झामुमो, काँग्रेस,माले, राजद ,भारत ज्ञान विज्ञान समिति सहित अन्य राजनीतिक दलों व संगठनों के दर्जनों नेता, कार्यकर्ताओं का जमावड़ा लगना शुरू हो गया था। केंद्र सरकार के नये कृषि बिल के खिलाफ़ लोगों ने सड़क पर हीं बैठकर जमुआ-कोडरमा, जमुआ-देवघर, जमुआ-गिरिडीह और जमुआ द्वारपरहरी मार्ग को सुबह से हीं जाम कर दिया। जाम में बैठने वालों में मुख्य रूप से काँग्रेस नेत्री मंजू कुमारी,उप प्रमुख काँग्रेस नेता चंद्रशेखर राय, माले की मीना दास,असगर अली, अशोक पासवान, झामुमो प्रखंड सचिव रंजीत कुमार, पूर्व प्रखंड प्रमुख झामुमो नेत्री सोनी चौरसिया ,कोंग्रेस प्रखंड अध्यक्ष महशर इमाम, चुंगलो मुखिया झामुमो नेता दिनेश मंडल , जाहिद अंसारी, ओमप्रकाश माहतो, कासिम अंसारी, सचिदानंद सिंह, लक्ष्मी साव, राजद के त्रिभुवन यादव, इनामुल हक़, असगर अली, मो असरार,जुनैद आलम,मो आलम,मो राजा रोहित दास वहाब अली सहित अन्य अन्य संगठनों के लोग शामिल हुए। जमुआ प्रशासन की पहल पर तकरीबन 12 बजे जाम को समाप्त किया गया। जमुआ बीडीओ बिनोद कुमार कर्मकार, सीओ रामबालक कुमार, पुलिस इंस्पेक्टर विनय राम, जमुआ थाना प्रभारी प्रदीप कुमार दास ने जाम पर बैठे नेताओं से आग्रह कर जाम को हटवाया। इस बीच लोग केन्द्र सरकार और नये कृषि बिल के खिलाफ़ और किसानों के पक्ष में जमकर नारे लगाते रहे। सोनी चौरसिया सहित अन्य नेताओ ने कहा कि यह लड़ाई हमारे अन्नदाताओं और कॉरपोरेट घरानों के बीच है केंद्र की सरकार इस लड़ाई में कॉरपोरेट घरानों के एजेंट के रूप में कार्य कर रहे हैं। हम अपने अन्नदाताओं के साथ खड़े हैं। केन्द्र सरकार को किसानों, कामगारों, नौजवानों की फ़िक्र नहीं है उन्हें सिर्फ़ अपने कॉरपोरेट मित्रों की फ़िक्र है। इस बिल से जहां देश की कृषि ब्यवस्था कॉरपोरेट घरानों के चंगुल में आ जायेगी वहीं जमाखोरी और महंगाई चरम पर पहुंच जायेगी। किसानों के साथ-साथ देश के आमजनों को भी जीवन निर्वाह करना दूभर हो जायेगा। कुछ लोग या तो इसे समझ नहीं रहे हैं या तो समझकर भी समझना नहीं चाह रहे हैं।

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