कुंदन कुमार की रिपोर्ट :-
मधुश्रावणी व्रत कथा के ग्यारहवें दिन नई दुल्हनों को सुनाई गई सावित्री और सत्यवान की कथा–
बांका :-
प्रखंड क्षेत्र में इन दिनों मधुश्रावणी व्रत कथा को लेकर भक्ति का माहौल बना हुआ है जहां एक तरफ सावन के महीने में हर जगह हर हर महादेव के जय कारे लग रहे हैं तो दूसरी तरफ खासकर मैथिल ब्राह्मणों के यहां आयोजित मधुश्रावणी कथा के क्रम में देवी के गीत से पूरा वातावरण भक्तिमय हो रखा है गुरुवार को मधुश्रावणी व्रत कथा के ग्यारहवें पूजा के दिन नई दुल्हनों को सावित्री और सत्यवान की कथा सुनाई गई जिसमें महिला पुरोहित के द्वारा सावित्री के पतिव्रता की वजह से स्वयं यमराज भी भ्रमित होकर आखिरकार सावित्री के पति के प्राण वापस करते हैं कथा के क्रम में महिला पुरोहितों ने बताया कि जब सत्यवान के प्राण हार कर यमराज ले जा रहे थे तो सावित्री में अपने पति धर्म और अपनी हठ के कारण यमराज के पीछे पीछे चलने लगी जब यमराज ने जीवित आदमी का अपने साथ आना अनुचित बताकर उन्हें वापस लौटने की सलाह दी तो वह अपने पति के प्राण छोड़कर वापस लौटने को राजी नहीं हुई इस पर कथा के मुताबिक यमराज ने सावित्री को एक वरदान मांगने के लिए कहा जिस पर सावित्री ने काफी सोच वचार कर यमराज से पुत्रवती होने का वरदान मांग लिया वचन में बंधे होने के कारण यमराज ने तथास्तु कहा और आगे चल रही है लेकिन सावित्री उनके पीछे-पीछे चलने लगी यमराज नेहरू के कर जब उन्हें अपने पीछे आने का कारण पूछा तो उन्होंने कहा कि जब आप मेरे पति के प्राण हर कर जा रहे हैं तो फिर आपके दिए गए वचन का क्या फायदा और यमराज को अपने वचनबद्ध के कारण सावित्री के पतिवर्ता धर्म की वजह से उन्हें उनके पति के प्राण वापस करने पड़े आठवें दिन की कथा समाप्ति के बाद प्रसाद वितरण और मंगल गीत से पूरा घर आंगन नवविवाहिताओं का गुंजायमान हो रहा है पूजा को लेकर नवविवाहिता वर्षा के घर शालू रिशू मिक्की रितु




