नहीं रहे लोकयुद्ध के सम्पादक बृज बिहारी पाण्डेय!

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धीरज शर्मा भागलपुर

भाकपा-माले केंद्रीय कंट्रोल कमीशन के चेयरमेन और हिंदी मुखपत्र समकालीन लोकयुद्ध के प्रधान सम्पादक कामरेड बृज बिहारी पाण्डेय नहीं रहे। 76 वर्षीय कामरेड बृज बिहारी पाण्डेय पिछले ढाई-तीन महीने से अस्वस्थ थे और पटना के एक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। 11 अगस्त को उनके आंत का सफल ऑपरेशन किया था किंतु उनकी स्थिति अचानक बिगड़ लगी और कल 26 अगस्त को पटना अस्पताल में ही उन्होंने अपनी अन्तिम सांस ली।
ये जानकारी देते हुए भाकपा-माले के नगर प्रभारी व ऐक्टू के राज्य सचिव मुकेश मुक्त ने बताया उनके निधन से भागलपुर सहित देश भर के समस्त पार्टी कतार शोक में डूब गए हैं। उत्तराखंड के अल्मोड़ा में जन्मे कॉमरेड बृज बिहारी पाण्डेय बहुत ही मृदुभाषी व उदार थे। उनमें सीखने-सिखाने की अद्भुत ललक थी। धैर्य जैसे दुर्लभ गुण से परिपूर्ण कामरेड बृज बिहारी विषम परिस्थितियों में भी अडिग रहा करते थे। पत्रकारिता में वे आर्थिक विषयों पर लिखने वाले एक प्रतिष्ठित नाम रहे। उनका जीवन बेहद सरल था। गंभीर व जटिल कामों को भी कम समय में पूरा कर देना उनकी खासियत थी। उन्होंने पार्टी के अंग्रेजी मुखपत्र लिबरेशन में भी काम किया। जीवन के अंतिम सांस तक पार्टी के बतौर पूर्णकालिक योद्दा अपनी भूमिका निभाते रहे। अपने पीछे पत्नी और दो बेटियां छोड़ गए है। आज भागलपुर शहर सहित रंगरा, कहलगांव, खरीक, नाथनगर, नौगछिया आदि प्रखंडों में उनकी तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभिनी श्रद्धांजलि दी गयी। पटना में आज उनका अंतिम संस्कार हुआ। भाकपा-माले के राज्य कमिटी सदस्य व ऐक्टू के राष्टीय उपाध्यक्ष एसके शर्मा ने उन्हें याद करते हुए कहा कि अपने समय के सर्वश्रेष्ठ रिजनल इंजीनियरिंग कॉलेज, दुर्गापुर के प्रतिभावान छात्र के रूप में वे नक्सलबाड़ी आंदोलन से जुड़ गए थे। चमकदार कैरियर की राह को छोड़कर वे गरीब मजदूर-किसानों का भारत बनाने की लड़ाई में पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में शरीक हो गए। भाकपा-माले के दूसरे महासचिव कॉमरेड विनोद मिश्र के साथ इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़ कर उन्होंने नक्सलबाड़ी आंदोलन में बिहार के दहकते खेत - खलिहानों का रास्ता चुन लिया। भाकपा-माले के नक्सलबाड़ी के दौर से आज तक जनता की महान क्रान्तिकारी परम्परा की जीवित अंतिम कड़ियों में से वे एक थे। बंगाल, झारखंड, बिहार के गांवों में संघर्षों को संवारते हुए वे भाकपा-माले के केंद्रीय कमेटी सदस्य रहे। लंबे समय से गंभीर हृदय रोग से पीड़ित होने के वावजूद उनके पढ़ाई-लिखाई पर कोई ज्यादा फर्क नहीं पड़ा था। वे हिंदी, अंग्रेजी और बांग्ला भाषा में सिद्ध हस्त थे। भाकपा-माले के संगठनकर्ता के तौर पर उन्होंने अपनी भूमिका भी सफलता से निभाई। सालों अपने पैतृक गांव से दूर रहने के बावजूद वे पहाड़ी जानने वालों से कुमाउँनी में ही संवाद करते थे। अच्छे पति के साथ वे अपनी पुत्रियों के एक बहुत अच्छे पिता भी साबित हुए। संघर्ष पूर्ण हालातों में अभावग्रस्त जीवन के बावजूद उन्होंने रचनात्मकता को आगे बढ़ाया। कॉमरेड बीबी पाण्डेय हमेशा यादों में बने रहेंगे। आप का संघर्ष जनता की लड़ाइयों में आगे बढ़ता रहेगा। पार्टी-जनसंगठनों की ओर से भाकपा-माले के राज्य कमिटी सदस्य एस के शर्मा, जिला सचिव बिंदेश्वरी मंडल, नगर प्रभारी व ऐक्टू के राज्य सचिव मुकेश मुक्त, नगर सचिव सुरेश प्रसाद साह, जिला कमिटी सदस्य पुरुषोत्तम दास, रणधीर यादव व विष्णु कुमार मंडल, ऐपवा जिला सहसचिव कंचन देवी, सुरेश संगम, रविन्द्र कुमार मंडल, प्रसादी साह, अजीत, अभिरुचि, मिथुन कुमार, सर्वजीत रॉकी, नगर कमिटी सदस्य अमर कुमार, सुभाष कुमार, प्रवीण कुमार पंकज व लूटन तांती, लोचन, हुक़ूमलाल, लालबहादुर मंडल, विमलकिशोर निराला, सुशील मंडल, सुजीत, सुरेंद्र, वकील, अनिल मंडल आदि ने शोक व्यक्त कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

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