धर्मेंद्र पांडे

बाढ़ की दर्दनाक तस्वीर आई सामने ,पानी से घिरा इलाका जहाँ तक नजर जाये पानी ही पानी ,जिंदगी से जंग लड़ते इलाके के लोग, अब मरने के बाद भी अंतिम संस्कार में परेशानी ,श्मशान में आया पानी तो निकाला अजूबा तरकीब,बांस के खूंटे के सहारे पानी में बनाया जोगार ,फिर किया अंतिम संस्कार ,कंधे पर शव रख नाव से ही निकाला अंतिम यात्रा।
ये तस्वीर कुशेश्वरस्थान प्रखंड के महिसौत गाँव की है जहां बाढ़ का पानी हर साल अपने साथ तबाही लाता है।ये इलाका बाढ़ के समय 6 महीना तक पानी से डूबा हुआ रहता है यहां जिधर नजर जाएगा सिर्फ पानी ही पानी और नाव ही नाव चलता देखा जा सकता है।
सोमवार को 90 वर्षीय सिवनी यादव की मौत हो गई जिसके बाद परिवार के साथ ग्रामीणों के सामने उनके अंतिम संस्कार की समस्या आन पड़ी क्योकि पूरा इलाका जलमग्न है और गांव का श्मशान में पानी आ गया है साथ ही गांव में कोई ऐसा सूखा हुआ जमीन उपलब्ध हो जहां पर अंतिम संस्कार किया ।ऐसे में ग्रामीणों ने मजबूरी में एक तरकीब निकाली और गांव से सटे श्मशान में बीच मझधार में बांस का चचरी बनाया और उसे पानी मे खूंटे के सहारे खड़ा किया फिर उसके ऊपर मांटी से बना गोल घेरे को (गांव में कोठी कहते है जिसमे अनाज को सुरक्षित रखा जाता है)रख कर उसके अंदर शव को रख दिया फिर ऊपर से लकड़ी रख दिया गया।जिसके बाद शव को ग्रामीणों के द्वारा गाजा बाजा के साथ नाव से अंतिम सफर के लिये निकाला गया और नाव से ही शव को लेकर उस जगह पर ग्रामीण जुटे जिसके बाद जो शव को मुखग्नि देगा उनको नाव से ही ग्रामीणों के मदद से शव के चारो तरफ घुमाया जाता है फिर नाव पर चढ़े चढ़े ही शव को अग्नि के हवाले कर दिया जाता है।इस बीच जैसे पूरा गांव चारो तरफ नाव लेकर उमड़ पड़ा सा दिखाई देता है।




