शंखनाद संवाददाता
दुनिया में तकनीकी का डंका बजाने वाले जापान ने भारत के शिक्षक का ब्लैकबोर्ड मॉडल देखकर कहा अद्भुत
जरमुंडी (दुमका)
सुदूर आदिवासी क्षेत्र में स्थित दुमका जिला के डुमरथर विद्यालय के प्रिंसिपल डॉ सपन कुमार के नवाचार ब्लैकबोर्ड मॉडल का जापान के प्रोफेसर एवं छात्रों ने वेबीनार के माध्यम से लाइव जुड़कर अध्ययन किया। तकनीकी रूप से दुनिया में समृद्ध जापान के प्रोफ़ेसर एवं छात्र भारत के शिक्षक के नवाचार को देखकर अचंभित रह गए। बुधवार को 2 घंटे तक लगातार वेबिनार के माध्यम से सपन के कक्षा को लाइव देखा। इस संबंध में डॉ सपन कुमार ने बताया कि 19 जनवरी को जापान के ओसाका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर कीमा तुजिनो अपने छात्रों के साथ डूमरथर मध्य विद्यालय में 2020 से ही कोरोना काल से अनवरत पढ़ाने के लिए अपनाए गए नवाचार ब्लैकबोर्ड मॉडल को देखा एवं छात्रों ने इसके बारे में विस्तार से चर्चाएं की|कठिन परिस्थिति में बच्चों को पढ़ाने के लिए ब्लैकबोर्ड आइडिया को किस प्रकार किया गया और कैसे गांव के सभी मिट्टी के घरों पर ब्लैकबोर्ड बनाया गया इसे देखा| कोविड 19 के दौरान शिक्षा के क्षेत्र में अपनाएं गए नवाचार के बारे में भारत -जापान के अनुभव को वेबिनार के माध्यम से साझा किया गया। डॉ सपन ने कहा कि दुमका जिला के अत्यंत पिछड़ा क्षेत्र का नाम विश्व स्तर पर हो रहा है ।इससे उन्हें काफी खुशी मिल रही है और बेहतर काम करने की प्रेरणा मिल रही है।उन्होंने कहा कि आज के बच्चे ही कल के भविष्य हैं और इस विकट परिस्थिति में कोरोना जैसे विकट परिस्थिति में पढ़ाई को बंद कर देना देश के विकास में बाधक बन सकता था। इसलिए पूरी दुनिया के गरीब घर के बच्चे जिसके पास स्मार्टफोन नहीं है,ब्लैक बोर्ड मॉडल अपनाकर मोहल्ला क्लास से पढ़ा सकते है।भारत के कई राज्यों में भी इस मॉडल को अपनाया गया है| झारखंड के भी कई जिलों में इसे सफलतापूर्वक किया जा रहा है। आदिवासी क्षेत्रों में गरीब घर के बच्चों को पढ़ाना बहुत ही कठिन कार्य है ,लोगों को जागरूक करने के साथ उनमें पढ़ाई के प्रति रुचि पैदा करना और बच्चों के हाथ में किताब पकड़वाना एवं शिक्षा से जोड़ना बहुत ही कठिन कार्य है। इस कार्य को समुदाय के सहयोग से लगातार डुमरथर में किया जा रहा है|इसकी चर्चा जापान,अमेरिका, लंदन, चीन ,कोलंबिया, कनाडा ,अर्जेंटीना सहित कई देशों में हो रही है। उसी कड़ी में जापान के प्रोफेसर ने 19 जनवरी को वेबिनर के माध्यम से देखा एवं डॉ सपन कुमार से विस्तार से बातचीत की।
बताते चलें कि जापान भारत वेबिनार कार्यक्रम की कोऑर्डिनेटर डॉ दीपा दास ने कार्यक्रम का संचालन किया । उन्होंने बताया कि भारत के नवाचार को विदेशों में सराहा जा रहा है खासकर तकनीकी रूप से समृद्ध जापान जैसे देश में डॉ सपन के मॉडल को वहां के प्रोफ़ेसर, छात्रों ने काफी पसंद किया है। उन्होंने बताया कि जिस प्रकार से कठिन परिस्थिति में डॉ सपन ने अद्भुत तरीके से गरीब घर के बच्चों को बिना स्मार्टफोन के पढ़ाने का काम किया है वह अनुकरणीय है। जापान के प्रोफ़ेसर ने डुमरथर के सभी बच्चों और शिक्षक के प्रति आभार व्यक्त किया और उन्होंने सपन के नवाचार को अद्भुत कहा।उन्होंने डुमर थर आने की इच्छा जताई।उन्होंने कहा कि इस वेबिनार के माध्यम से उनके विश्वविद्यालय के छात्रों को काफी लाभ मिलेगा। इस कार्यक्रम में एनसीईआरटी नई दिल्ली के प्रोफेसर डॉ शरद सिन्हा भी जुड़ी हुई थी।




