शंखनाद संवाददाता
दुमका
आज बुधवार को नकटी गांव में किसान मजदूर संगठनों ने एआईकेएस एवं आदिवासी अधिकार मंच के संयुक्त तत्वाधान में मजदूर किसान एकता दिवस मनाया| यहां बता दें की 1982 में ट्रेड यूनियनों के भारत बंद के आह्वान पर तमिलनाडु में मजदूरों पर गोलियां चलाई गईं थी, जिसमें 16 किसान मजदूर शहीद हो गए थे और कई घायल हुए थे|उसी दिन से मजदूर किसान बुनियादी मांगों को लेकर पूरे देश में एकता दिवस मनाते हैं| यह घटना आज से 40 वर्ष पूर्व हुई थी, इसी क्रम में कोविड-19 गाइडलाइन का पालन करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में यह कार्यक्रम मनाया गया है|आज ग्राम नकटी में जो शहर के नजदीक है वहां कई गांवों के मजदूर किसान कार्यकर्ता उपस्थित हुए और अपने एकता का परिचय दिया|अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि एक साल तक किसानों ने संघर्ष कर सरकार को घुटने टेकने पर मजबूर किया| उसमें बहुत सारी मांगे जो सरकार ने मानी है उसे लागू नहीं किया जा रहा है| आज के दिन मोदी सरकार से पुनः मांग करते है कि उन सभी मांगों को लागू किया जाए|किसानों पर हुए झूठे मुकदमे, एमएससीपी के लिए कमेटी बनाने, शहीद किसानों के परिजनों को मुआवजा देने आदि मांगों को अभिलंब मोदी सरकार पूरा करने की दिशा में पहल करें| अन्यथा पुनः उसी तरह से आंदोलन पूरे देश में फिर से शुरू होगा|अवसर पर किसान मजदूर एकता दिवस का नेतृत्व कर रहे किसान सभा के जिला सचिव कॉमरेड देवी सिंह पहाड़िया आदिवासी अधिकार मंच के संथाल परगना प्रमंडल के संयोजक कॉमरेड सुभाष हेंब्रम समेत कॉमरेड विष्णु राणा सचिव नक्की ब्रांच, कॉमरेड मंसूर अंसारी सचिव श्री अमरा ब्रांच, कुंदन सिंह सचिव कोरिया ,ब्रांच महिला किसान नेता साद मुन्नी देवी, कॉमरेड नीम धन तुरी, कॉमरेड नीलू हेंब्रम, कॉमरेड रसका सोरेन , कॉमरेड पुतुल देवी, कॉमरेड लीना मुर्मू, कौशल्या देवी, लील मुन्नी देवी, विमल हेंब्रम आदि दर्जनों लोग उपस्थित थे।




