आकाश कुमार
पूर्णिया.
पूर्णिया: स्थापना दिवस समारोह पर एयरपोर्ट 4 पूर्णिया की मांग ने पकड़ा जोर, बोले लोग -कार्यक्रम भर नहीं ये आंदोलन की हुंकार
मौका पूर्णिया के 253 वे स्थापना दिवस समारोह का था, लिहाजा शहर के कला भवन से लेकर पॉलिटेक्निक स्थित ऑडोटोरियम तक स्थापना दिवस समारोह की गीतों से गूंजता रहा. वहीं शहर के हृदयस्थली आर एन शॉ चौक स्थित होटल हॉलीडे के आउटर परिसर में पूर्णिया एयरपोर्ट की मांग को लेकर एयरपोर्ट 4 पूर्णिया कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का नेतृत्व ग्रीन पूर्णिया और शहर के वरिष्ठजनों की टीम ने किया. जहां सभी ने एक सुर में पूर्णिया एयरपोर्ट निर्माण की मांग दोहराई।

शहर के जाने माने चित्रकार गुल्लू दा ने सांकेतिक पूर्णिया हवाई अड्डा का रूप गढ़ा. तैयारियों में कोई कोर कसर अधूरी न रह जाए, लिहाजा ग्रीन पूर्णिया के बच्चों से लेकर मेंबर तक खुद मोर्चा संभाले नजर आए. मुद्दा हर आम और खास की जुबां से हवाई अड्डा निर्माण की बात गूंजती नजर आई. ग्रीन पूर्णिया के बच्चों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से पूर्णिया हवाईअड्डे की जरूरत आमजनों को समझाई. प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक के जरिए एकजुट होकर इस मुद्दे पर अपनी आवाज बुलंद करने का संदेश दिया. हर किसी की जुबां पर पूर्णिया एयरपोर्ट था.
महिलाएं हो या पुरुष. बच्चे हो या नौजवान वी वांट एयरपोर्ट जैसे तख्तियों के साथ सभी अपनी आवाज बुलंद कर रहे थे. एयरपोर्ट पर बनाए मोहक गीत कलाकारों का जत्था प्रस्तुत कर रहा था तो दूसरी तरफ शहर के आम से लेकर खास तक अर्धवृत की शक्ल लिए पूर्णिया एयरपोर्ट की मांग पर सुर से सुर मिला रहे थे. धर्म, जाति और राजनीत से इतर आज मसला बस एक था पूर्णिया एयरपोर्ट.
पूर्णिया हवाईअड्डा का सपना साकार हो, इसके लिए थर्मोकोल के हवाईजहाज को गुब्बारे से लगाकर आकाश में छोड़ा गया. ताकि उड़ाने भरने का रास्ता साफ था. वहीं कार्यक्रम के आखिर में पुलवामा हमले में मारे गए शहीदों के लिए मोमबत्ती जलाकर दो मिनट का मौन रखा गया.
इस बाबत कार्यक्रम की अगुवाई कर रहे डॉ ए के गुप्ता और समाजसेवी विजय श्रीवास्तव ने कहा कि पूर्णिया एयरपोर्ट का मुद्दा लंबे समय से अधर में अटका है. 13 साल बीत गए मगर पूर्णिया एयरपोर्ट का सपना साकार नहीं हो सका. राजनीतिक रस्साकसी में करोड़ों की आबादी पीस रही है. इस कार्यक्रम के जरिए आगे होने वाले आंदोलन की बिगुल फंकी गई है.
बाइट1- कार्यक्रम संयोजक, डॉ ए के गुप्ता
बाइट 2- विजय श्रीवास्तव, सोशल एक्टिविस्ट




