छपरा में मानवाधिकार की टीम क्या खोजने आई है समझ से परे- विजय कुमार चौधरी!

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रिपोर्ट – अमित कुमार

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की एक टीम छपरा शराब कांड की जांच करने पटनी आई है, और छपरा जा रही है।
यह बिहार सरकार की समझ से परे है।
उनके अधिकार क्षेत्र में क्या-क्या शामिल है।

छपरा जहरीली शराब कांड मामले में क्या देखने और समझने आये हैं।

छपरा कांड से मानवाधिकार से क्यों जोड़ा जा रहा है। यह हमारे समझ में नहीं आ रहा है।

मानवाधिकार के संरक्षण या उल्लंघन या अधिकार से एनएचआरसी के क्षेत्र में आता है।

इसलिए यह टीम क्यों क्यों आई है।
शराब पीने से मौत का सबसे ज्यादा आंकड़ा एमपी, यूपी, हरियाणा, गुजरात में है।

बिहार मौत में सबसे निचे पायदान पर है।

फिर क्यों मानवाधिकार अन्य राज्यों में क्यों नहीं गई। बिहार ही क्यों आई है।

गुजरात के मोरबी पुल ध्वस्त और मौत मामले की जांच के लिए में ऱाष्स्ट्रीय मानवाधिकार आयोग क्यों नहीं गई। वहां की पुल सरकार ने बनाई थी।

जबकि बिहार में शराबबंदी लागू की है और मौत अवैध शराब के पिने के मामले में मानवाधिकार आयोग किस मानव अधिकार की जांच करने आई है।
हम लोगों को आश्चर्य है और इस बात से दुखी है कि बिहार सरकार के कार्यों का डिस्क्रीमेट करने का क्या मतलब है।
भाजपा के लोग कभी बोले हैं कि शराब पिना गलत है। इन्होंने शराब पीने वाले को शराब नहीं पिने का सलाह दिये हैं। इनको जनता से न हमदर्दी है और ना ही मौत पर अफसोस है।

जनता की हमदर्दी को दरकिनार करके ये लोगों को गुमराह क्यों कर रहे हैं?

इन्होंने विधानसभा में सर्वसम्मति शपथ लिया था कि शराबबंदी लागु हो।
पहले तो मानवाधिकार आयोग आने की सूचना मिडीया के माध्यम से सरकार को मिला है।
अबतक मात्र अधिकारिक 42 मौत की सूचना है।

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