धीरज शर्मा की रिपोर्ट
शुक्रवार को आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष के अवसर पर गणपत राय सलारपुरिया सरस्वती विद्या मंदिर एवं पूरनमल सावित्री देवी बाजोरिया सरस्वती शिशु मंदिर नरगाकोठी चंपानगर के राकेश सलारपुरिया सभागार में चल रहे त्रिदिवसीय आचार्य कार्यशाला के तीसरे और समापन दिवस का प्रारंभ प्रधानाचार्य नीरज कुमार कौशिक,उप प्रधानाचार्य अशोक कुमार मिश्र, विभाग सह प्रमुख विनोद कुमार, आचार्या कुमारी सविता, एवं लिली कुमारी द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
कार्यशाला के अंतिम दिवस के अवसर पर शुभकामना संदेश के क्रम में उप प्रधानाचार्य अशोक कुमार मिश्र ने कहा कि हम लोग तीन दिनों तक सामूहिक रूप से बैठकर विचार विमर्श से पूरे वर्ष के लिए योजना का निर्माण किया है उस योजना के क्रियान्वयन हेतु अपने इस संकल्प को बनाए रखने से ही कार्यशाला का उद्देश्य फलीभूत होगा। नई ऊर्जा के रूप में नए सत्र में अपनों के द्वारा बनाए वार्षिक योजना के माध्यम से विद्यालय के छात्र एवं समाज के विकास के लिए निरंतर सक्रिय रहना हमारा कर्तव्य है। जीवन में सफलता मंजिल नहीं है। छात्रों के माध्यम से राष्ट्र हित का कार्य करना भी महत्वपूर्ण उद्देश्य है।
शुभकामना संदेश के क्रम में लिली कुमारी ने कहा कि विगत सत्र की खामियों पर चर्चा करते हुए इस निर्बल पक्ष को सबल बनाने के लिए योजना का निर्माण किया गया। नई ऊर्जा के साथ छात्रों के विकास हेतु निरंतर सक्रियता का भाव बना रहे।
विभाग सह प्रमुख विनोद कुमार ने कहा कि विद्यालय का छात्र एवं उनका ज्ञान विनम्रता तथा अनुशासन के माध्यम से समाज में समरसता एवं अच्छाई देने का प्रयास करना चाहिए। हमारा उत्कृष्ट शिक्षण समाज में दिखना चाहिए। शिक्षा से समाज एवं राष्ट्र में परिवर्तन आता है। छात्र विद्यालय का प्रतिनिधि है एवं दर्पण है। विद्यालय से प्राप्त ज्ञान के प्रसार से ही हमारा शिक्षण पद्धति प्रतिबिंबित होता है।
विद्यालय के सचिव उपेंद्र रजक ने कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास एवं आचार्यों के सतत विकास हेतु वर्ष भर की योजना बनाने के लिए आचार्य कार्यशाला का आयोजन किया जाता है। बच्चों के साथ बच्चा बनकर यानी उनके बौद्धिक स्तर के अनुसार अपना स्तर बनाकर अध्यापन करने से शिक्षा में उत्कृष्टता आती है। विद्या से ही जीवन के उद्देश्यों की पूर्ति संभव है।
आज के कार्यशाला में वार्षिकोत्सव, अभिभावक संपर्क ,मातृ गोष्ठी ,गुरु पूर्णिमा उत्सव ,प्रांतीय प्रतियोगिता, प्रांतीय खेलकूद, सेवा कार्य ,संस्कृति ज्ञान परीक्षा, संस्कार केंद्र का विस्तार करने पर विचार किया गया। सेवा प्रकल्प, नवीन प्रयोग का निर्माण तथा केंद्रीय आधारभूत विषयों के क्रियान्वयन पर विचार किया गया। नए-नए शिक्षण उपकरण बनाकर नूतन पद्धति से अध्यापन करने की योजना बनाई गई मुक्त चिंतन के उपरांत शांति मंत्र के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
मंच संचालन कार्यक्रम प्रमुख अभिमन्यु कुमार एवं कार्यक्रम सह प्रमुख डॉ संजीव झा के द्वारा किया गया तथा अतिथि परिचय अनिल मिश्रा के द्वारा कराया गया। धन्यवाद ज्ञापन प्रधानाचार्य नीरज कुमार कौशिक द्वारा किया गया।
इस अवसर पर विद्यालय के सचिव उपेंद्र रजक,भागलपुर विभाग के सह विभाग प्रमुख विनोद कुमार, प्रधानाचार्य नीरज कुमार कौशिक, उप प्रधानाचार्य अशोक कुमार मिश्र, कार्यक्रम प्रमुख अभिमन्यु कुमार, कार्यक्रम सह प्रमुख डॉ संजीव झा, लिली कुमारी ,कुमारी सविता तथा विद्यालय के सभी आचार्य बंधु भगिनी उपस्थित थे।




