ऋषिकेश की रिपोर्ट
एट्रेड यूनियनों की 28 और 29 मार्च को दो दिन की राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल से बैंकों का कामकाज भी आंशिक रूप से प्रभावित हो सकता है. बैंक कर्मचारियों की यूनियनों के एक वर्ग ने सोमवार और मंगलवार की इस हड़ताल का समर्थन किया है।
मजदूर विरोधी कानून और निजीकरण के विरोध समेत आठ सूत्री मांगों को लेकर नालंदा जिले के 500 बैंक कर्मी हड़ताल पर चले गए हैं गौरतलब है कि नालंदा जिले में सोमवार के दिन सभी बैंक कर्मियों के द्वारा अपने अपने काम को ठप कर अपनी मांगों को लेकर बैंक परिसर में ही प्रदर्शन किया इस दौरान बैंक कर्मियों के द्वारा प्रधानमंत्री और वित्त मत्री के विरोध में मुर्दाबाद के नारे बाजी भी की। प्रदर्शन कर रहे बैंक कर्मियों ने बताया कि पूरे नालंदा जिले में करीब 28 तो बैंक बंद रहेंगे जिससे सरकार को करोड़ों रुपए का घाटा होगा इतना ही नहीं इस 2 दिनों के अंदर बैंक धारकों को भी काफी परेशानी होगी इस 2 दिनों के हड़ताल पर हम सरकार को यह दिखाना चाहते हैं कि अब सरकार की मनमानी नहीं चलेगी क्योंकि हमारी बैंक कर्मियों की चट्टानी एकता अभी जिंदा है।इनकी प्रमुख मांगों में श्रम संहिता को समाप्त करना, किसी भी प्रकार के निजीकरण को रोकना, राष्ट्रीय मौद्रीकरण पाइपलाइन को समाप्त करना, मनरेगा के तहत मजदूरी के लिए आवंटन बढ़ाना और ठेका श्रमिकों को नियमित करना शामिल है।
अगर हमारी मांगे पूरी नहीं होती है तो आगे भी हमारे हड़ताल इसी तरह से जारी रहेगा।
बाइट।बैंककर्मी
ऋषिकेश संवाददाता नालंदा




