जाली पर्चा व जाली नकल के बाद बंदोबस्त कार्यालय दुमका का नया कारनामा

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ब्यूरो रिपोर्ट

बिहार सर्वे एंड सेटलमेंट मैनुअल 1959 की अवहेलना कर बना दिया गया अभिलेखपाल

निम्नवर्गीय लिपिक कुमार पुष्पक को बना दिया गया अभिलेखागार का अभिलेखपाल

दुमका

बंदोबस्त पदाधिकारी दुमका द्वारा बिहार सर्वे एंड सेटलमेंट मैनुअल 1959 के विरुद्ध एक निम्न वर्गीय लिपिक को दुमका बंदोबस्त अभिलेखागार का अभिलेखपाल बना दिया गया है,जिसको लेकर वरीय कर्मचारियों में भारी रोष देखा जा रहा है|मैनुअल के पृष्ठ 24 पार्ट III के अनुसार अराजपत्रित पदों पर प्रोन्नति अथवा अन्य किसी प्रक्रिया द्वारा पद परिवर्तन करने की शक्तियां किसी बंदोबस्त पदाधिकारी को नहीं है|उल्लेखनीय है कि नियमानुसार अभिलेखागार के अभिलेखपाल वही हो सकते हैं जो मून्शरीम हो,अगर मून्शरीम उपलब्ध नहीं है तो मोहरीर की नियुक्ति उक्त पद पर की जा सकती है, लेकिन मोहरीर रहते हुए स्थापना द्वारा निम्नवर्गीय लिपिक की संचिका बढ़ाकर आदेश ले लिया गया है|

गौरतलब है कि विभाग द्वारा समय-समय पर दिशा-निर्देश मिलने के बावजूद सरकार के आदेश की उपेक्षा करते हुए निम्नवर्गीय लिपिक को अभिलेखपाल बना दिया गया है जिसे अभिलेख नियमावली की कोई जानकारी ही नहीं है,यही वजह है कि दुमका बंदोबस्त कार्यालय हमेशा जाली पर्चा व नकल के लिए बदनाम होता रहा है| यहां बताते चलें कि निम्नवर्गीय लिपिक कुमार पुष्पक को वरीय मोहरीरो की उपेक्षा करते हुए अभिलेखपाल बना दिया गया है|बताते चलें कि बंदोबस्त कार्यालय दुमका का यह एकलौता मामला नहीं है ऐसे और भी कई मामले हैं जिनमें नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए दागी कर्मचारियों को उच्च पद पर बैठा दिया गया है,जिसका खुलासा जल्द किया जाएगा|

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