माता सीता कुंड धाम में उमड़ा भक्तों का सैलाब, भगवान श्रीराम और माता सीता से जुड़ा है पवित्र धाम!

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रिपोर्ट – धर्मेंद्र कुमार!



जब माता सीता को ब्याहकर लौट रही थी भगवान श्रीराम की बारात, तब सीताकुंड धाम में हुआ था विश्राम!

सदियों पुरानी मान्यता, आज भी कायम परंपरा—सीताकुंड धाम से जल लेकर शुरू होती है दुर्गा पूजा की आस्था यात्रा!

सीताकुंड के जल से निकली कलश यात्रा, ढोल-नगाड़ों के बीच मां दुर्गा की स्तुति में उमड़े हजारों श्रद्धालु!

शारदीय नवरात्रि की शुरुआत के साथ ही मां दुर्गा की आराधना को लेकर पूरे देश में भक्ति का माहौल है। पूर्वी चंपारण में भी जगह-जगह पूजा पंडालों में कलश स्थापना के लिए जल यात्रा निकाली जा रही है। इसी कड़ी में रामायणकालीन धार्मिक मान्यता से जुड़े प्राचीन सीताकुंड धाम से जल लेकर पूजा-अर्चना करने की परंपरा का निर्वहन किया जा रहा है। सीताकुंड धाम में विभिन्न पूजा समितियों के सदस्यों और श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है।

सिरसिया दुर्गा पूजा समिति ने निकाली कलश यात्रा

पिपरा प्रखंड के सिरसिया में दुर्गा पूजा समिति की ओर से वर्षों से सीताकुंड धाम का जल लेकर कलश यात्रा निकालने की परंपरा निभाई जा रही है। इस वर्ष भी समिति के श्रद्धालु सीताकुंड धाम पहुंचे और वहां से जल लेकर गाजे-बाजे, ढोल-नगाड़ों के साथ कलश यात्रा निकाली। यात्रा में बड़ी संख्या में बच्चे, महिलाएं और अन्य श्रद्धालु शामिल हुए। मां दुर्गा के जयकारों और स्तुति गान से माहौल भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं ने पारंपरिक विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की।

श्रीराम की बारात के विश्राम से जुड़ी है सीताकुंड की मान्यता

प्राचीन सीताकुंड धाम को लेकर धार्मिक मान्यता है कि भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह के बाद जनकपुर से लौट रही बारात तीसरे दिन इस स्थल पर रुकी थी। मान्यता के अनुसार, यहां बारात में शामिल लोगों ने विश्राम किया था। सुबह माता सीता ने सीताकुंड में स्नान किया और भगवान शिव की आराधना के लिए शिवलिंग की स्थापना की थी। इसी धार्मिक मान्यता के कारण सीताकुंड धाम को विशेष महत्व प्राप्त है।

आस्था और परंपरा का आज भी निर्वहन

सीताकुंड धाम से जल लेकर पूजा पंडालों तक पहुंचाने और कलश स्थापना करने की परंपरा हर वर्ष नवरात्रि के अवसर पर देखने को मिलती है। सिरसिया की दुर्गा पूजा समिति सहित विभिन्न पूजा समितियां इस परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं। कलश यात्रा में हजारों श्रद्धालुओं की भागीदारी क्षेत्र की धार्मिक आस्था और मां दुर्गा के प्रति उनकी श्रद्धा को दर्शाती है!

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