बकरी पालकों के लिए बड़ा प्लान! बनेगा Goat Federation, मिलेगा उचित मूल्य, ऋण और बेहतर बाजार।

SHARE:

रिपोर्ट – अमित कुमार!

बिहार के ग्रामीण इलाकों में बकरी पालन करने वाले किसानों के लिए बड़ी पहल की तैयारी है। अब छोटे और सीमांत बकरी पालकों को अकेले बाजार और बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। उन्हें सहकारी समिति के जरिए संगठित कर बेहतर बाजार, उचित मूल्य और तकनीकी सुविधाओं से जोड़ने की योजना है।
प्रखंड स्तर पर प्राथमिक बकरी सहकारी समितियां बनाई जाएंगी। इन समितियों के माध्यम से बकरी पालकों को चारा, दवा, टीकाकरण, पशु चिकित्सा और प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं सामूहिक रूप से उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।
सबसे बड़ा फायदा बाजार के स्तर पर मिलने की उम्मीद है। बकरी पालक अपनी बकरियों और बकरी उत्पादों की सामूहिक बिक्री कर सकेंगे, जिससे बिचौलियों की भूमिका कम होगी और बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ेगी।
इसके साथ ही बकरी पालकों को बैंक ऋण, सरकारी योजनाओं, सब्सिडी और बीमा से जोड़ने की व्यवस्था विकसित करने की बात कही गई है। स्थानीय स्तर पर बकरा-बकरियों की बिक्री के लिए हाट स्थापित करने की योजना भी है।
अब बात करते हैं Goat Federation यानी बकरी पालक परिसंघ की।
प्राथमिक समितियों से जुड़े बकरी पालकों को आगे प्रमंडल और राज्य स्तर के परिसंघ से जोड़ा जाएगा। यह परिसंघ बड़े बाजारों तक पहुंच, सामूहिक ब्रांडिंग, मूल्य संवर्द्धन और सीधे खरीदारों से संपर्क बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
भविष्य में राजधानी और प्रमुख मुख्यालयों में मीट कियोस्क स्थापित करने की योजना है। इन कियोस्क के जरिए स्वच्छ और हाइजेनिक मीट उपलब्ध कराने के साथ रोजगार के अवसर भी पैदा किए जा सकेंगे।
वहीं, बकरी के दूध को भी संगठित बाजार से जोड़ने की योजना है। इसके लिए सुधा जैसे नेटवर्क के माध्यम से बकरी के दूध की बिक्री की संभावनाएं तलाशने की बात कही गई है।
इसके अलावा प्रखंड से जिला स्तर तक मार्ट विकसित करने की योजना है, जहां बकरी पालकों को दवा, चारा, दाना और मिनरल मिक्सचर जैसी सामग्री उचित दर पर उपलब्ध कराई जा सके।
इस पूरी व्यवस्था में महिलाओं, ग्रामीण युवाओं और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की भागीदारी पर विशेष जोर रहेगा।
हालांकि इसके सामने चारा संकट, पूंजी की कमी, तकनीकी जानकारी और बाजार की चुनौतियां बड़ी समस्या हैं। इनके समाधान के लिए सामूहिक चारा उत्पादन, सहकारी ऋण, नियमित प्रशिक्षण और डिजिटल बाजार से जुड़ाव पर जोर दिया जा रहा है।
कुल मिलाकर, प्राथमिक बकरी सहकारी समिति से लेकर Goat Federation तक की यह व्यवस्था अगर प्रभावी तरीके से जमीन पर उतरती है, तो बकरी पालन को सिर्फ पारंपरिक आजीविका नहीं बल्कि एक संगठित ग्रामीण व्यवसाय और रोजगार के बड़े माध्यम में बदला जा सकता है।

Join us on:

और पढ़ें