रिपोर्ट – अमित कुमार!
पटना। बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ दिलीप जायसवाल ने मंगलवार को पटना में आयोजित सहयोग कार्यक्रम में आमजनों से सीधी मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग जमीन, दाखिल-खारिज, म्यूटेशन और सर्वे से जुड़ी शिकायतें लेकर पहुंचे थे। मंत्री ने एक-एक कर सभी की बातें सुनी और संबंधित अधिकारियों को त्वरित निपटारे के निर्देश दिए।
डॉ जायसवाल ने कहा कि राजस्व विभाग की पहली और सबसे बड़ी प्राथमिकता राज्य में चल रहे जमीन सर्वे को समय पर पूरा करना है। उन्होंने खुद को ईमानदार बताते हुए कहा कि पारदर्शिता के बिना व्यवस्था नहीं सुधर सकती और इसी सोच के साथ वे काम कर रहे हैं। मंत्री ने इस बात पर चिंता जताई कि सर्वे के कारण कई गांवों और मोहल्लों में भाई-भाई के बीच विवाद बढ़ गए हैं। छोटी-छोटी जमीन को लेकर मारपीट और दंगा-फसाद की नौबत आ रही है। इसी वजह से सरकार ने तय किया है कि सर्वे कार्य को युद्ध स्तर पर निपटाया जाए ताकि लोगों के बीच आपसी तनाव कम हो और जमीन से जुड़े झगड़े खत्म हों।
उन्होंने बताया कि 15 अगस्त के अवसर पर सरकार कुछ जिलों में सर्वे कार्य पूरा होने की घोषणा कर सकती है। यह उन जिलों की सूची होगी जहां फील्ड कार्य लगभग समाप्त हो चुका है और रिकॉर्ड के मिलान का अंतिम चरण चल रहा है। मंत्री का कहना था कि सर्वे पूरा होते ही लोगों की सबसे बड़ी समस्या हल हो जाएगी क्योंकि सही रिकॉर्ड सामने आने के बाद दावे और आपत्तियां अपने आप कम हो जाएंगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सर्वे के दौरान किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर कोई अधिकारी या कर्मचारी लापरवाही करता पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सहयोग कार्यक्रम में आए लोगों ने मंत्री के सामने रजिस्ट्री में देरी, ऑनलाइन दाखिल-खारिज में तकनीकी दिक्कत, पुराने रिकॉर्ड न मिलने और कर्मचारियों के व्यवहार से जुड़ी शिकायतें रखीं। डॉ जायसवाल ने आश्वासन दिया कि इन सभी मुद्दों पर विभाग स्तर पर समीक्षा की जाएगी और प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाएगा ताकि आम आदमी को बार-बार दफ्तर के चक्कर न लगाने पड़ें। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा है कि जमीन से जुड़ा हर काम समय सीमा में हो और आमजन को राहत मिले। अंत में मंत्री ने लोगों से अपील की कि वे सर्वे टीम का सहयोग करें और सही जानकारी दें ताकि विवाद की गुंजाइश ही न रहे।




