अगर मेरी सीढ़ी टूट सकती है तो अतिक्रमण करने वाला चाहे जो भी हो उनका मकान भी टूटेगा ही- कॉमरेड रामबली चंद्रवंशी!

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रिपोर्ट – अमित कुमार!

पटना में आज अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा की ओर से आयोजित प्रेस वार्ता में अध्यक्ष कॉमरेड रामबली चंद्रवंशी ने राज्य सरकार की अतिक्रमण विरोधी मुहिम पर तीखा सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अगर मेरी सीढ़ी टूट सकती है तो अतिक्रमण करने वाला चाहे जो भी हो उनका मकान भी टूटेगा ही। लेकिन देखने वाली बात यह है कि अतिक्रमण की कार्रवाई बड़े लोगों के खिलाफ क्यों नहीं चल रही। राजेंद्र नगर, कंकड़बाग और मौर्य होटल जैसी जगहों पर किसकी जमीन है, यह सब जानते हैं फिर भी बड़े लोगों के घरों पर बुलडोजर नहीं चल रहा।

कॉमरेड रामबली चंद्रवंशी ने कहा कि असल में जिनके घर तोड़े जा रहे हैं वे भूमिहीन हैं, गरीब हैं, दलित हैं और वंचित हैं। ये वही लोग हैं जो आजादी से पहले या आजादी के तुरंत बाद से इन बस्तियों में रह रहे हैं। हमारा मानना है कि सड़कें चौड़ी होनी चाहिए, रोड बनना चाहिए, तटबंध बनना चाहिए और विकास का काम होना चाहिए। लेकिन विकास के नाम पर दलित-गरीब मजदूर बस्तियों को उजाड़ा नहीं जा सकता। ये बस्तियां अंग्रेजों के समय में बसीं और जमींदारों के समय में बसीं। इसी सच्चाई को समझते हुए बिहार पहला राज्य था जिसने आजादी के तुरंत बाद 1947 में पीपी एक्ट बनाया। उस एक्ट का प्रावधान साफ था कि जमींदार की जमीन पर, रैयत की जमीन पर, गैरमजरूआ आम और खास पर जो लोग बसे हुए हैं उन्हें पर्चा मिलेगा।

उन्होंने पत्रकारों को बताया कि बिहार में मुसहर बस्तियां, भुइयां बस्तियां, ऋषिदेव टोला, डोम, मेहतर, खतवे, हलखोर, बांतर सहित तमाम दलित और महादलित जातियों की हजारों बस्तियां आज भी रेगुलराइज नहीं की गई हैं। कांग्रेस के जमाने में कुछ भूमि कॉलोनियां बनीं और नब्बे के दशक में लालू जी के समय में भी कुछ बस्तियां बनीं। आप राजेंद्र नगर चले जाइए, सगुना मोड़ के पास चले जाइए, यारपुर और लोहानीपुर चले जाइए, वहां शहरों में दलित-गरीबों के लिए बस्तियां उसी दौर में बनी थीं।

लेकिन अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि नीतीश जी के बीस वर्षों के शासन में बिहार में एक भी नई बस्ती दलित-गरीबों के लिए नहीं बनी है। उल्टे पुरानी बस्तियां ही उजाड़ी गई हैं। यही हमारा सबसे बड़ा आरोप है। सभा ने मांग की है कि पीपी एक्ट को ईमानदारी से लागू किया जाए, जिन बस्तियों में लोग दशकों से रह रहे हैं उन्हें पर्चा देकर नियमित किया जाए और विकास के नाम पर गरीबों का उजाड़ना बंद किया जाए।

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