रिपोर्ट – अमित कुमार!
उनका कहना है कि जनता ने जो जनादेश दिया है उसे वह पूरी विनम्रता के साथ स्वीकार करते हैं और सिर आंखों पर रखते हैं। लेकिन जिस तरह कांग्रेस और प्रशांत किशोर के समर्थक खुशियां मना रहे हैं उसे देखकर वह समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिर खुशी की वजह क्या है। कांग्रेस के तो खुद उम्मीदवार मैदान में नहीं थे और उनके सहयोगी RJD तीसरे नंबर पर खिसक गए हैं। ऐसे में यह जश्न किस बात का है यह समझ से परे है।
गिराज सिंह ने बात को समझाने के लिए 2009 का उदाहरण दिया। उस समय वह नीतीश कुमार के साथ मंत्री थे और 17 सीटों पर उपचुनाव हुए थे। उसमें NDA को 12 सीटों पर हार मिली थी। उस वक्त भी RJD और कांग्रेस के लोग बहुत उछल रहे थे और लग रहा था कि अब सरकार बदल जाएगी। लेकिन जब 2010 का विधानसभा चुनाव आया तो जनता ने फिर से NDA पर भरोसा जताया और 89 प्रतिशत स्ट्राइक रेट के साथ 202 सीटें देकर स्पष्ट बहुमत दिया। उनका तर्क है कि एक उपचुनाव या एक छोटे नतीजे को देखकर यह मत मान लीजिए कि जनता ने सरकार बदलने का मन बना लिया है।
उन्होंने प्रशांत किशोर पर भी निशाना साधा। उनका कहना है कि प्रशांत किशोर बड़ी बातें कर रहे हैं और लग रहा है जैसे वह राज्य को पूरी तरह बदल देंगे। लेकिन सच्चाई यह है कि 243 सीटों वाली विधानसभा में 138 सीटों पर उनकी पार्टी ने चुनाव लड़ा और एक भी सीट नहीं जीत पाई। गिरिराज सिंह पूछते हैं कि जब जमीन पर एक भी सीट नहीं आई तो किस बात का दंभ है। वह कहते हैं कि परिस्थितिवश जनता ने जो आदेश दिया है उस पर इतना मत इतराइए। हम अपनी गलतियों को मानते हैं और जनता ने जो सजा दी है उसे स्वीकार करते हैं।
गिराज सिंह ने आगे कहा कि जनता अब पुराने दिनों में वापस नहीं जाना चाहती। साठ साल तक कांग्रेस ने राज किया और उसके बाद बिहार की सड़कों और बिजली की हालत सबके सामने थी। आज उसमें कितना बदलाव आया है यह हर गांव कस्बे में दिख रहा है। फिर जनता उन लुटेरों को क्यों लाएगी जो पहले राज कर चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अभी RJD और प्रशांत किशोर एक दूसरे को गाली दे रहे हैं लेकिन आगे चलकर दोनों एक हो जाएंगे।
अंत में उन्होंने गोरखपुर का उदाहरण दिया जहां उपचुनाव में भाजपा हार गई थी लेकिन उसके बाद योगी आदित्यनाथ फिर से बड़ी जीत के साथ आए। इसी तरह बिहार में भी जनता कभी अखिलेश यादव को लाने की बात नहीं करेगी और न ही तेजस्वी यादव और कांग्रेस को यहां स्वीकार करेगी। कुल मिलाकर गिरिराज सिंह का संदेश यही है कि हार जीत लोकतंत्र का हिस्सा है, हम उसे मानते हैं, लेकिन जनता ने NDA को नकार नहीं दिया है और आने वाले समय में फिर से वही भरोसा मिलेगा।




