जैन धर्म के आठवें तीर्थंकर भगवान चंद्रप्रभु एवं भगवान पार्श्वनाथ का जन्म एवं तप कल्याणक जैन मंदिर में बड़े ही धूमधाम से मनाया गया!

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:- राम कुमार

झुमरीतिलैया जैन धर्म के आठवें तीर्थंकर भगवान चंद्रप्रभु एवं भगवान पार्श्वनाथ का जन्म एवं तप कल्याणक जैन मंदिर में बड़े ही धूमधाम से मनाया ,जिसमें सर्वप्रथम जैन मंदिर के मुलवेदी में विराजमान पारसनाथ भगवान की प्रतिमा प्रथम अभिषेक ओर शांतिधारा बिनोद-ललिता जैन गंगवाल ने सौभाग्य प्राप्त किया वहीं भगवान का मंगल विहार कर पांडुकशीला पर विराजमान कर प्रथम अभिषेक का सौभाग्य अशोक विकास जैन पाटोदी ने प्राप्त किया वही 1008 चंदप्रभु भगवान पर विश्व शांति हेतु शांतिधारा का सौभाग्य अजय-अमित जैन गंगवाल को प्राप्त हुआ बड़े मंदिर के शांतिनाथ जिनालय में भगवान पारसनाथ की प्रतिमा पर प्रथम अभिषेक शांतिधारा का सौभाग्य अमरेश विनीत जैन गंगवाल को प्राप्त हुआ सभी ने अपने जीवन को धन्य बनाया, देश में हो रही महामारी को दूर करने हेतु सभी ने शांति की कामना की इस अवसर पर समाज के मंत्री ललित जैन सेठी ने कहा कि भगवान का जन्म कल्याणक आने का मतलब अपना कल्याण के मार्ग को अग्रसर करना है और जन्म मरण से रहित होकर मोक्ष को प्राप्त करना है। भगवन अपनी आत्मा से रहित होकर अपनी आत्मा में लीन होकर परमात्मा होने वाले वैसे सभी जैन धर्म के 24 तीर्थंकर का कल्याणक पूरे भारत में जैन समाज के लोग धूमधाम भक्ति भाव से मनाते हैं आज से कई हजार वर्ष पूर्व और पौष कृष्ण एकादशी के दिन वाराणसी नगरी मैं दोनों भगवान का जन्म हुआ था तब से भगवान का जन्म कल्याणक पूरे भारत में मनाया जाता है ।सुबोध जैन गंगवाल एवं आशा जैन गंगवाल के द्वारा संगीतमय पूजन करते हुए दोनों भगवान के श्री चरणों में जन्म कल्याणक का श्रीफल चढ़ाया । संध्या में भव्य आरती संगीत भजन के साथ समाज के लोगों ने भगवान का पालना झूलाया । सभी कार्यक्रम में समाज के लोगों शामिल हुए । 31 तारीख के रात्रि में जैन समाज के द्वारा श्री दिगंबर जैन मंदिर जी में नववर्ष का आगमन पर संदया में 40 दीपको के साथ भक्तामर का पाठ कर एक एक दीप प्रज्वलित किया जाएगा ।रात्रि में भजन संध्या का कार्यक्रम चलेगा जो नए वर्ष का आगमन तक चलेगा।उक्त जानकारी मीडिया प्रभारी राज कुमार जैन अजमेरा,नवीन जैन ने दी

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