रिपोर्ट – मिथुन कुमार!
नालंदा जिले के 52 बूटी साड़ी को मिला जी आई टैग। बुनकरों में खुशी का माहौल।जीआई टैग मिलने से बुनकरों का होगा उत्थान।मंत्री श्रवण कुमार ने सरकार के प्रति जताया आभार।नीतीश कुमार का सपना हुआ पूरा।
नालंदा :बिहार की सांस्कृतिक और हस्तशिल्प विरासत के लिए गौरवपूर्ण खबर है। नाबार्ड और बिहार सरकार के संयुक्त प्रयासों से राज्य के तीन पारंपरिक उत्पादों नालंदा की बावन बूटी साड़ी एवं फैब्रिक, गया के पथरकट्टी स्टोन क्राफ्ट और भोजपुर की पीढ़िया पेंटिंग को जीआई टैग की मान्यता मिल गई है।मंत्री श्रवण कुमार ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि नालंदा की बावन बूटी कला बिहार की प्राचीन बुनकरी परंपरा की अनमोल धरोहर है, जिसमें हाथकरघे पर 52 प्रकार के पारंपरिक प्रतीकों की बुनाई की जाती है। जीआई टैग मिलने से इस कला की नकल पर रोक लगेगी और बुनकरों को उनके उत्पाद का बेहतर मूल्य मिल सकेगा। वहीं, गया का पथरकट्टी स्टोन क्राफ्ट और भोजपुर की पीढ़िया पेंटिंग को भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी। सरकार का मानना है कि इससे स्थानीय कारीगरों और बुनकरों को आर्थिक लाभ होगा, ग्रामीण उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा तथा निर्यात और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। यह उपलब्धि बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण साबित होगी।उन्होंने कहा पूर्व सीएम नीतीश कुमार ने हमेशा से वसवनबीघा के 52 बूटी एवं बुनकरों को आगे बढ़ाने काम किया जिसका आज प्रतिफल है कि जीआई टैग मिला है।
बाइट:श्रवण कुमार ग्रामीण विकास मंत्री



