आरा/आशुतोष पाण्डेय
भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले की न्यायिक जांच अब तेज हो गई है। आरा में न्यायिक जांच आयोग का कार्यालय खोल दिया गया है। आयोग के अध्यक्ष, पटना हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा ने मीडिया से बातचीत कर साफ किया कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी और घटना के हर पहलू की पड़ताल की जाएगी। सरकार ने इस मामले की न्यायिक जांच के लिए आयोग का गठन किया था।
17 जून को भोजपुर के बिलौटी गांव में पुलिस मुठभेड़ में भरत तिवारी की मौत हुई थी। परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि भरत तिवारी ने हथियार डालकर आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद उन्हें गोली मारी गई। इसी विवाद के बाद बिहार सरकार ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग का गठन किया।
आरा में मीडिया को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति विनोद कुमार सिन्हा ने बताया कि आयोग कई अहम बिंदुओं पर जांच करेगा। इनमें पुलिस कार्रवाई की वैधता, मुठभेड़ की वास्तविक परिस्थितियां, उपलब्ध वीडियो और डिजिटल साक्ष्यों की जांच, प्रत्यक्षदर्शियों एवं पुलिसकर्मियों के बयान, मेडिकल और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का परीक्षण तथा घटना के दौरान तय मानकों का पालन हुआ या नहीं, जैसे पहलू शामिल हैं। आयोग ने कहा कि सभी पक्षों को निष्पक्ष तरीके से सुना जाएगा और तथ्यों के आधार पर रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाएगी।
उधर, भरत तिवारी का परिवार लगातार इसे फर्जी एनकाउंटर बताते हुए दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहा है। मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी जारी है और न्यायिक जांच की रिपोर्ट पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। आयोग की सक्रियता के बाद यह माना जा रहा है कि अब जांच प्रक्रिया और तेज होगी।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में शाहाबाद प्रक्षेत्र डीआईजी, भोजपुर जिलाधिकारी तनय सुल्तानिया, भोजपुर पुलिस अधीक्षक राज आदि शामिल थे




