रिपोर्टर– राजीव कुमार झा!
अफवाह व तस्करी रोकने पर प्रशासन की पैनी नजर, सीमांत दुकानदारों को सतर्क रहने का निर्देश
रात में पहरी और पैदल पेट्रोलिंग बढ़ाने पर बनी सहमति— बैठक में हुआ निर्णय, जिला प्रशासन और एसएसबी का संयुक्त अभियान तैयार
ऐंकर– मधुबनी जिले के वरीय पुलिस अधीक्षक, योगेन्द्र कुमार ने आज एसएसबी एवं बेनीपट्टी अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, मधवापुर थानाध्यक तथा अन्य पुलिस पदाधिकारियों व कर्मियों की मौजूदगी में भारत- नेपाल सीमावर्ती क्षेत्र मधवापुर थाना के अंतर्गत सीमांत सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने तथा संदिग्ध गतिविधियों की रोकथाम के उद्देश्य से सभी दुकानदारों के साथ एक विशेष बैठक आयोजित किया। बैठक में दोनों अधिकारियों ने सीमा पार से हो रही अवैध गतिविधियों, तस्करी तथा संदिग्ध व्यक्तियों पर सतर्क रहने के निर्देश दिए है। एसएसपी ने कहा कि स्थानीय नागरिक और व्यापारियों की सक्रिय भागीदारी सुरक्षा नेटवर्क को मजबूत बनाएगी। उन्होंने दुकानदारों से आग्रह किया है कि वे किसी भी असामान्य या संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत नजदीकी थाना अथवा एसएसबी चौकी को दें। इसके साथ ही मोबाइल नंबर, हेल्पलाइन और त्वरित रिपोर्टिंग चैनल साझा किए गए ताकि सूचना का त्वरित आदान-प्रदान सुनिश्चित हो सके। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक योगेन्द्र कुमार ने सीमावर्ती व्यापारिक गतिविधियों पर नियमित निगरानी रखने तथा पहचान पत्रों के सत्यापन को और कड़ाई से लागू करने के निर्देश दिए है, उन्होंने शाम व रात के समय क्षेत्र में पेट्रोलिंग बढ़ाने और संवेदनशील स्थानों पर पोस्ट तैनात करने की भी रूपरेखा बताई। बैठक के दौरान दुकानदारों को सामान की पारदर्शी लेन-देन और संदिग्ध माल के आने-जाने पर विशेष सतर्कता बरतने की प्रेरणा दी गई। वहीं, एसएसबी के प्रतिनिधियों ने बताया कि सीमा पार से संदिग्ध घूमने वालों की पहचान हेतु साझा निगरानी और सीसीटीवी फुटेज के आदान- प्रदान की व्यवस्था पर विचार चल रहा है। साथ ही, दुकानदारों के बीच सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम, पुलिस और समुदाय के बीच विश्वास बढ़ाने हेतु मासिक बैठकें आयोजित करने पर भी सहमति बनी। बैठक में स्थानीय व्यापारियों ने सुरक्षा पहल का स्वागत करते हुए कहा कि इससे न केवल सीमा सुरक्षा में सुधार होगा, बल्कि सामान्य नागरिकों तथा व्यापारिक गतिविधियों को भी सुरक्षा का भरोसा मिलेगा। अधिकारियों ने कहा कि सामूहिक सतर्कता व समझ बढ़ाने से सीमांत व्यवस्था में दीर्घकालिक सुधार संभव होगा और इसके लिए स्थानीय समुदाय की भागीदारी अनिवार्य रहेगी।




