रिपोर्टर– राजीव कुमार झा
मधुबनी जिले के बेनीपट्टी स्थानीय अंचल कार्यालय में बुधवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब पटना से पहुंची निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने लिपिक (क्लर्क) को रंगे हाथों रिश्वत लेते हुए दबोच लिया. पकड़े गये लिपिक की पहचान अंचल कार्यालय में लिपिक के रूप में पदास्थापित साकेत कुमार के रूप में की गई. साथ ही निगरानी की टीम ने लिपिक के साथ एक बिचौलिए को भी गिरफ्तार किया है. जिसकी पहचान बेनीपट्टी अंचल के धकजरी गांव निवासी परमानंद झा के रूप में की गई है. मिली जानकारी के अनुसार, बेनीपट्टी अंचल के परजूआर पंचायत के दाहिला गांव निवासी रविंद्र यादव से खेसरा 2626 के बिहार सरकार के बेलगान भूमि से अतिक्रमण खाली करवाने के एवज में आरोपी लिपिक ने घुस की मांग की थी. आरोपी लिपिक ने पहले तो काम के बदले 30,000 रुपये की मांग की थी. लेकिन पीड़ित रविंद्र ने अपनी आर्थिक तंगी और गरीबी का हवाला दिया तो अंततः 15,000 रुपये में तय हुआ. तय सौदे के अनुसार,बुधवार को 15 हजार में से अग्रिम के तौर पर तत्काल 10 हजार रुपये का भुगतान होना था. शेष बकाये राशि का भुगतान अतिक्रमण खाली होने के बाद किये जाने की बात हुई थी. अग्रिम की राशि देने के लिये पीड़ित रविंद्र बुधवार की दोपहर 12 बजे के आस-पास अंचल कार्यालय पहुंचा और कार्यालय परिसर में जैसे ही 10 हजार रुपये का नोट दिया गया वैसे ही पहले से ही अंचल कार्यालय में मुश्तैद निगरानी अन्वेषण ब्यूरो पटना की छह सदस्यीय टीम ने लिपिक साकेत और उसके सहयोगी बिचौलिए परमानन्द झा को रुपयों के साथ रंगे हाथ धर दबोचा. निगरानी टीम की इस कार्रवाई से पूरे अंचल सह प्रखंड कार्यालय परिसर में हड़कंप मच गया. वहीं पीड़ित रविंद्र ने बताया कि उनके घर के आगे बिहार सरकार की बेलगान भूमि है, जिसे पीड़ित का परिवार रास्ते के रूप में उपयोग करता था. लेकिन बेनीपट्टी अंचल के दहिला गांव निवासी राम नारायण यादव और खजौली अंचल के लक्ष्मीपुर गांव के राम वृक्ष यादव ने उक्त सरकारी भूमि को अतिक्रमण कर उस पर पक्का निर्माण कर लिया. जिससे शिकायतकर्ता रविंद्र का घर से बाहर निकलने का रास्ता बंद हो गया. इसी मामले को लेकर पीड़ित ने अंचल कार्यालय में आवेदन देकर मामले की जांच और कार्रवाई की गुहार लगाई. लेकिन मामले का निष्पादन नही हो सका तो पीड़ित लोक शिकायत निवारण कार्यालय द्वितीय प्राधिकार सह जिला पदाधिकारी के कार्यालय में परिवाद दायर किया. जहां से अंचल प्रशासन से उक्त भूमि से संबंधित रिपोर्ट मांगा गया. रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद जिला पदाधिकारी ने बेनीपट्टी अंचल को अतिक्रमण वाद चलाते हुए उक्त भूमि से अतिक्रमण खाली कराने का आदेश बीते 9 मार्च को ही दिया था. तब से अंचल कर्मियों द्वारा टालमटोल किया जा रहा था. उधर 15 हजार रिश्वत देने की बात तय होते ही पीड़ित रविंद्र ने निगरानी अन्वेषण विभाग में शिकायत दर्ज कराई. शिकायत दर्ज होने के बाद टीम ने मामले का सत्यापन किया और फिर आखिरकर बुधवार को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के डीएसपी समीर कुमार झा के नेतृत्व में 6 सदस्यीय टीम जाल बिछाकर रिश्वरखोर लिपिक को रिश्वत लेने के दौरान ही धर दबोचा. गिरफ्तारी के बाद निगरानी की टीम दोनों आरोपितों को अपने साथ पटना ले गई, जहां उनसे आगे की पूछताछ की जाएगी. निगरानी डीएसपी ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद सत्यापन सुनिश्चित होते ही एक खास सीरियल के चिन्हित अंकों वाले 10 हजार के 500-500 सौ के 20 नोट दिए गये थे, जो छापेमारी के दौरान आरोपितों के पास से बरामद हुआ है. उन्होंने बताया कि आरोपी लिपिक के कहने पर वहां मौजूद बिचौलिये उस रुपये को शिकायत कर्ता के हाथों से प्राप्त किए थे. पकड़े जाने के बाद दोनों आरोपितों के अंगूठे पर लगे केमिकल की भी जांच की गई, जिसमें रिश्वत लेने की पुष्टि हुई है. दोनों आरोपितों को निगरानी अन्वेषण की न्यायालय में प्रस्तुत किया जायेगा. इस घटना के बाद बेनीपट्टी अंचल व प्रखंड कार्यालय के अन्य कर्मियों और बिचौलियों के बीच हड़कंप मचा हुआ है. वहीं स्थानीय लोगों ने निगरानी विभाग की इस कार्रवाई की सराहना की है.




