रिपोर्ट – पंकज कुमार
जहानाबाद जिले से स्वास्थ्य व्यवस्था की सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़ा करने वाला एक मामला सामने आया है. काको थाना क्षेत्र के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में चोरों ने दुस्साहस दिखाते हुए स्टोर रूम का ताला तोड़ने के बजाय खिड़की की ग्रिल काटकर लाखों रुपये के जीवनरक्षक उपकरणों पर हाथ साफ कर दिया. सरकार एक तरफ अस्पतालों को आधुनिक बनाने के लिए करोड़ों के संसाधन दे रही है, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के कारण ये कीमती सामान अब चोरों के निशाने पर हैं. इस घटना ने अस्पताल प्रशासन की सतर्कता की पोल खोल दी है.
स्टोर प्रबंधक मनीष पांडेय से मिली जानकारी के मुताबिक, स्टोर रूम में कुल 6 ऑक्सीजन कॉन्सन्ट्रेटर मशीनें रखी हुई थीं. 16 अप्रैल तक सभी उपकरण अपनी जगह पर सुरक्षित थे. चोरी का खुलासा तब हुआ जब 17 अप्रैल को दूसरे पीएचसी (PHC) में मशीनें भेजने के लिए लिस्ट तैयार की जा रही थी. जब स्टोर खोला गया, तो वहां का नजारा देखकर कर्मचारी दंग रह गए. चोरों ने खिड़की की ग्रिल काटकर भीतर प्रवेश किया था और वहां से 4 ऑक्सीजन कॉन्सन्ट्रेटर मशीन, एक ऑक्सीजन सिलेंडर और एक पंखा चोरी कर लिया. चोरों ने न केवल चोरी की, बल्कि जाते-जाते 2 अन्य मशीनों को क्षतिग्रस्त कर दिया और कमरे के बिजली के तार भी काट दिए.हैरान करने वाली बात यह है कि चोरी की घटना पता चार-पांच दिन पहले ही हो गई थी लेकिन पांच दिन बीत जाने के बाद भी अब तक पुलिस को इसकी लिखित सूचना नहीं दी गई है. इतनी बड़ी सरकारी संपत्ति की चोरी होने के बावजूद प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने में की जा रही देरी अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली पर गंभीर संदेह पैदा करती है. सवाल यह उठ रहा है कि क्या अस्पताल की सुरक्षा में तैनात गार्डों को ग्रिल कटने और बिजली के तार काटे जाने की भनक तक नहीं लगी? या फिर इस मामले में कोई बड़ी साठगांठ है जिसे दबाने की कोशिश की जा रही है.जब इस पूरे मामले पर अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी से जवाब मांगा गया, तो उनका बयान और भी ज्यादा हैरान करने वाला था. प्रभारी चिकित्सक का कहना है कि उन्हें इस चोरी की जानकारी आज ही मिली है. उन्हें अभी तक यह भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि वास्तव में कुल कितने सामान की चोरी हुई है. हालांकि, अब उन्होंने थाने में शिकायत दर्ज कराने के आदेश जारी करने की बात कही है. अब बड़ा सवाल यह है कि अगर स्टोर मैनेजर को 17 तारीख को ही पता चल गया था, तो प्रभारी तक यह खबर पहुँचने में 5 दिन का वक्त कैसे लग गया? फिलहाल, अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या पुलिस इन मशीनों को बरामद कर पाएगी.



