सम्पूर्ण मधुबनी जिले मे श्रध्दा, भक्ती और शांति पूर्ण माहोल मे माँ सरस्वती पूजा हुआ सम्पन्न!

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रिपोर्ट– राजीव कुमार झा!

विद्या की देवी को नम आंसुओं से विदाई, जिले भर मे माँ सरस्वती को किया भावभीनी अलविदा

छात्रों की नम आँखें बनीं आस्था का प्रतीक- सम्पूर्ण जिले भर में सरस्वती पूजा की धूम

‘जय माँ सरस्वती’ के जयकारों के साथ दिखा श्रद्धा-भक्ति का अनोखा संगम

सम्पूर्ण मधुबनी जिले मे श्रध्दा, भक्ती और शांति पूर्ण माहोल मे माँ सरस्वती पूजा हुआ सम्पन्न।विद्या की देवी माँ सरस्वती की पूजा हमेशा से ही ज्ञान, बुद्धि और उज्ज्वल भविष्य का प्रतीक रहा है। अंतरराष्ट्रीय कम्प्यूटर साक्षरता मिशन के द्वारा संचालित शारदा कम्प्यूटर, जयनगर के साथ ही सम्पूर्ण जिले भर मे विभिन्न शिक्षण सस्थानो, विद्यालयों, शिक्षारत बच्चो के द्वारा मदिरों विभिन्न पंडालो मे इस वर्ष भी माँ सरस्वती की पूजा बड़े ही श्रद्धा, भक्ति एवं हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। पूजा के बाद माँ की विदाई नम आँखों और भावुक माहौल में की गई, माता के विदाई के समय बच्चों के भक्ति को देखकर उपस्थित लोगों के दिल को छू गया। पूरे विधि-विधान से संपन्न पूजा में मंत्रोच्चारण, हवन और विशेष आरती का आयोजन किया गया। माँ सरस्वती के पूजा पंडाल को बरे ही मनोरम व आकर्षक रूप से सजाया गया था। तो वही जयनगर स्थित शारदा कम्प्यूटर के पूजा पंडालों मे स्थापित मूर्ति को बरे ही आकर्षक रूप मे फूलों, चंदन और अगरबत्ती से सजाया गया था। पूजा के उपरांत माता सरस्वती को पुष्पांजलि अर्पित की गई तथा प्रसाद वितरण किया गया। इस अवसर पर पंडालो मे विद्यार्थी, शिक्षक और स्थानीय लोगों ने बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने माँ सरस्वती से विद्या, बुद्धि, एकाग्रता और उज्ज्वल भविष्य की कामना किया। विदाई का क्षण सबसे भावुक रहा। जब माँ की मूर्ति को सम्मानपूर्वक विदा किया गया, तो वातावरण ‘माँ सरस्वती की जय’, ‘विद्या की देवी की जय’ के जयघोष से वातावरण गूंज उठा। विद्यार्थियों की आँखें नम हो गईं। छोटी-छोटी बच्चियों ने माँ के चरणों में सिर झुकाकर भावुक होकर विदाई दी। यह दृश्य इस बात का जीवंत प्रमाण है की माँ सरस्वती के प्रति इनके मन में कितनी गहरी आस्था और श्रद्धा बसी हुई है। एक विद्यार्थी ने कहा, “माँ सरस्वती हमारे जीवन की प्रेरणा हैं। उनकी विदाई हर वर्ष दिल को दुखी कर देती है, लेकिन यह हमें उनके आशीर्वाद की याद दिलाती है। शिक्षण संस्थानो मे शिक्षा के साथ-साथ सांस्कृतिक और धार्मिक मूल्यों का भी समावेश किया जाता है। संस्थान के संचालको ने सभी सहयोगीयों, विद्यार्थियों एवं उपस्थित जनों का आभार व्यक्त करते हुए कहा, “ऐसे आयोजन बच्चों में संस्कार, संस्कृति और श्रद्धा का भाव उत्पन्न करते हैं। वासंतिक नवरात्रि में माँ सरस्वती की पूजा न केवल धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि यह विद्यार्थियों को अनुशासन, एकता और भक्ति का पाठ पढ़ाती है। हम प्रतिवर्ष इस परंपरा को जीवंत रखेंगे।” पूजा में बड़ी संख्या में लोगों ने विभिन्न पूजा पंडालो मे पहूंच कर माँ शारदे का दर्शन – नमन एवं पूजन करते देखे गए। तो जयनगर मे कामनी, साक्षी, शांभवी, अंजली, माही, विकास, रंजन, नीतीश, मुकेश, आदित्य, प्रिया, आरती, अंशु, राजन, काजल, मोनी, महिमा, अंबिका, सिम्पल, निधि, निश्चल, राहुल, राज कुमार सहित कर लोगों ने पूरे श्रध्दा और भक्ति के साथ पूजा करते देखे गए। शिक्षकों ने भी पूजा का संचालन किया और बच्चों को माँ सरस्वती के महत्व के बारे में बताया। ऐसे कार्यक्रम न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करता हैं, बल्कि समुदाय में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करते हैं। बता दे कि जिला प्रशासन के स्पष्ट आदेश पर इस वर्ष डीजे, ट्रोली, अस्लील गाना एवं हुरदंगीयो पर जिले भर के थाना पुलिस पैनी नजर बना कर रखी हुई थी।

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