रिपोर्ट- अभिषेक कुमार!
हाई कोर्ट के स्टे ऑर्डर के बाद नगर प्रखंड के उप प्रमुख के रिक्त पद का चुनाव टला, एक गुटने कहा- कोर्ट को दिग्भ्रमित किया, दूसरे ने कहा- कोई प्रतिक्रिया देना गलत
गया. बिहार के गया जिला अंतर्गत नगर प्रखंड के उप प्रमुख के पद पर बुधवार को होने वाला चुनाव टल गया. इसका कारण हाईकोर्ट से स्टे ऑर्डर बताया गया है. स्टे ऑर्डर में फिलहाल चुनाव पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं. वहीं, अचानक चुनाव टाले जाने के मामले को लेकर नगर प्रखंड प्रमुख सरिता देवी ने कहा है कि हम लोग कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं, लेकिन कोर्ट को दिग्भ्रमित कर लोकतंत्र का गला घोटने का प्रयास किया जा रहा है.
कोर्ट को दिग्भ्रमित किया गया
इस संबंध में नगर प्रखंड प्रमुख के कार्यालय में प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया, जिसमें प्रखंड प्रमुख सरिता देवी ने कहा कि नगर प्रखंड के उप प्रमुख के पद पर अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के फलस्वरुप उक्त पद का निर्वाचन कराए जाने हेतु तिथि निर्धारित की गई थी. यह तिथि 7 फरवरी की थी. किंतु इस बीच निवर्तमान उपप्रमुख मुनीता देवी हाईकोर्ट चली गई. वहां उन्होंने न्यायालय को दिग्भ्रमित करने वाला पक्ष रखा, जिसके बाद हााकोर्ट ने उपप्रमुख के रिक्त पद के लिए होने वाले 7 फरवरी को होने वाले चुनाव के निर्धारित तिथि पर स्टे का आर्डर कर दिया. बताया कि वे हाईकोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं. किंतु मुनीता देवी ने कोर्ट के समक्ष जो दिग्भ्रमित करने वाला पक्ष रखा है, उसके खिलाफ वे भी न्यायालय में जाएगें.
कोर्ट के फैसला का सम्मान करना चाहिए
वहीं, चुनाव पर हाई कोर्ट का स्टे के बाद निवर्तमान उप प्रमुख मुनीता देवी ने इसे सही बताया है. कहा कि गया नगर प्रखंड में उप प्रमुख के चुनाव पर हाई कोर्ट का स्टे आर्डर आया है. 7 फरवरी को ही उप प्रमुख के रिक्त पद पर चुनाव होना था. निवर्तमान उपप्रमुख मुनिता देवी ने कहा कि उन्हें गलत तरीके से हटाया गया था. अब इस पद पर जो चुनाव होना था, उसपर फिलहाल उच्च न्यायालय का स्टे ऑर्डर आ गया है, तो हम लोगों को नहीं बोलना चाहिए.
निवर्तमान उप प्रमुख के समर्थन में उतरी पूर्व प्रमुख
वहीं, निवर्तमान उप प्रमुख के समर्थन में उतरी पूर्व प्रमुख सुचिता रजनी ने बताया है कि कोर्ट के फैसले का सम्मान करना चाहिए. उच्च न्यायालय का स्टे ऑर्डर आ गया है, तो हम लोगों को बोलना नहीं चाहिए. स्टे ऑर्डर आया है तो कहीं न कहीं ऐसी खामियां रही होगी, जिसमें नियम के विरुद्ध काम किए गए हो. यदि उच्च न्यायालय का फिर से आदेश आता है तो वोटिंग में जाया जाएगा. कहा कि अविश्वास प्रस्ताव लाया गया तो उसमें प्रमुख को पूरी तरह से दोष मुक्त कर दिया गया, जबकि उप प्रमुख को काम करने का मौका ही नहीं मिला और उनके विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाकर हटाया गया. ऐसे में न्यायालय में लोग गए और फिलहाल स्टे ऑर्डर उनके पक्ष में आया है, जिससे 7 फरवरी को होने वाला चुनाव टल गया।




