आकाश कुमार की रिपोर्ट :-
पूर्णिया पुलिस परिवार परामर्श केंद्र में 40 मामलों की सुनवाई की गई। जिसमें से 16 मामले निष्पादित किए गए 11 मामलों में समझा-बुझाकर पति-पत्नी का घर बसा दिया गया। 5 मामले में काफी समझाने के बाद भी जब बात नहीं बनी तो उन्हें थाना मथुरा न्यायालय की शरण लेने का सुझाव दिया गया। मामला को समझाने में केंद्र के सदस्य दिलीप कुमार दीपक, स्वाति वैश्ययंत्री, जीनत रहमान, रविंद्र शाह, प्रमोद जायसवाल एवं नारायण कुमार गुप्ता ने अहम भूमिका निभाई।
माधोपारा की एक पीड़िता के शिकायत थी की मधुबनी नाका स्थित उसका पति शराब पीकर बुरी तरह से मारपीट कर जख्मी कर दिया था। हॉस्पिटल गई वहां लेने के लिए तैयार नहीं हुआ तो प्राइवेट में डॉक्टर से इलाज करवाएं। 3 दिनों तक इलाज चला उसके बाद वह एसपी साहब के यहां आवेदन दी। उन्होंने उस आवेदन को सुनवाई के वास्ते परिवार परामर्श केंद्र के पास भेज दिया। फिर जैसे ही नोटिस मिला शराबी पति का सारा नशा काफूर हो गया। वह महिला समाज के लोगों के साथ मिलकर अपनी पत्नी के पास जाकर अपनी गलती स्वीकार किया पत्नी भी मान गई। केंद्र में आज दोनों पक्ष उपस्थित हुए पति ने शराब न पीने की कसम खाई और अपनी पत्नी को इज्जत के साथ रखने एवं उसके भरण पोषण को करने की बात कही। दोनों का बंधपत्र बनाया गया।पति आज ससुराल में रहेगा। कल सवेरे पत्नी को लेकर अपने घर चला जाएगा।
थाना सिमरी बख्तियारपुर की एक पीड़ित महिला ने अपने बेगूसराय निवासी पति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई कि मेरा पति और ससुराल वाले दान दहेज की मांग करते हैं, मारपीट करते हैं। दो तिथियों तक पत्नी आई, पति के नहीं आने से उसने आना बंद कर दिया। पति 3 तिथियों तक आया । दिल्ली में मजदूरी करता है। दिल्ली से प्रत्येक तिथि में उपस्थित हो रहा। किंतु पत्नी नोटिस के बाद भी नहीं आ रही है, इसलिए मामला स्थगित करते हुए सुझाव दिया गया वे चाहें तो थाना अथवा न्यायालय की शरण ले सकते हैं।




