संतोष तिवारी की रिपोर्ट :-
निमोनिया की चपेट में बड़ी संख्या में आते है कुपोषित बच्चे,जिसमें निमोनिया फेफड़ों पर ज्यादा असर कर रहा है। प्रदुषण भी एक सबसे बड़ा कारण,,
वल्ड निमोनिया डे
मुजफ्फरपुर
निमोनिया से पिछले एक साल में 300 बच्चे एसकेएमसीचए की पीआईसीयू में भर्ती किए गए। यह एक डाटा में बताया गया है, शिशु रोग विशेषज्ञ ख्याति प्राप्त डॉ अरुण शाह ने आज वल्ड
निमोनिया डे पर अपने यहाँ आने वाले लोगों के बीच विशेष रूप से जगरूकता के लिए सभी को एक छोटी सी पहल करने का आह्वान किया किसी भी बीमारी से बचने के लिए जगरूकता ही सबसे बड़ा हथियार होता है उन्होंने बताया की वायरल निमोनिया बढ़ गया है। बच्चों में अधिक हो रहा है। वायरल निमोनिया फेफड़ों पर ज्यादा असर कर रहा है।

उन्होंने बताया कि रोज निमोनिया के मरीज अस्पताल पहुंचते हैं। निमोनिया तापमान के बदलाव पर ज्यादा बढ़ जाता है। निमोनिया के साथ बच्चों में एलर्जी की समस्या भी बढ़ रही है। इससे उनमें दमा की शिकायत हो रही है। बताया कि छह महीने से दो वर्ष तक के बच्चे ज्यादा शिकार हो रहे हैं और इसका सबसे बड़ा कारण प्रदुषण भी है, इससे बचने के लिए बच्चों में इम्युन सिस्टम बढ़ाना जरूरी है। छोट बच्चों को मां का दूध जरूर पिलाना चाहिए। इसके अलावा बच्चों को भीड़भाड़ वाली जगहों पर नहीं ले जाना चाहिए, निमोनिया ने बिगाड़ा हाल, डॉ अरुण शाह ने बताया कि फाइब्रोसिस के तौर पर पहचाने जाने वाली इस दिक्कत की वजह से कुछ मरीजों को बार-बार अस्पताल में भर्ती होने की नौबत भी आ रही है। फाइब्रोसिस की वजह से उन्हें थोड़े-थोड़े दिनों के बाद सांस लेने में तकलीफ की समस्या से गुजरना पड़ रहा है।




