मंत्री इसरायल मंसूरी के विष्णुपद मंदिर में जाने का मामला पकड़ा तूल!

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मनोज कुमार की रिपोर्ट :-

गया- सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री मोहम्मद इसराइल मसूरी के मंदिर में प्रवेश करने के बाद अब यह मामला तूल पकड़ने लगा है हालांकि मंदिर को अभी तक फल्गु के जल से धोया और शुद्धिकरण किया गया जिसके बाद भगवान को भोग लगाया गया, इस मामले में जब विष्णुपद मंदिर प्रबंध कारिणी के अध्यक्ष शंभू लाल विट्ठल ने कहा कि उनके जाने के बाद भगवान विष्णु के भोग लगाने का समय था। मंदिर को 3 समय धोया जाता है। आहिन्दू का प्रवेश के परंपरा को तोड़ा गया है, यहां बड़े-बड़े बोर्ड में लिखा हुआ है कि अहिंदू प्रवेश निषेध है, फिर भी मंदिर के गर्भ गृह में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री मोहम्मद मंसूरी का प्रवेश करना पूरी तरह से गलत है, वही इसराइल मंसूरी ने मंदिर में प्रवेश करने को लेकर वे सौभाग्य की बात कह रहे हैं लेकिन उन्हें माफी मांगनी चाहिए। वही यह मामला तूल पकड़ने के बाद विष्णुपद मंदिर प्रबंधकारिणी समिति के अध्यक्ष शंभु लाल बिठाल ने बिहार सरकार से मंत्री की इस्तीफे की मांग की है।

विष्णुपद मंदिर में हिंदू प्रवेश निषेध के बावजूद मंत्री इसराइल मंसूरी ने किया प्रवेश, विभिन्न हिंदू संगठनों ने जताया विरोध ।

विश्व हिंदू परिषद प्रांत प्रवर्तन प्रमुख धर्म प्रसार विभाग के अध्यक्ष प्रेम कुमार टाइयां ने कहा कि यह पूरी तरह से गलत हुआ है, विष्णुपद मंदिर में आहिंदू प्रवेश निषेध के बावजूद गया जिला प्रभारी मंत्री सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री इजराइल मंसूरी के द्वारा विष्णुपद मंदिर में सीएम नीतीश कुमार के साथ प्रवेश करना बहुत ही गलत है, यह सालों से हमलोगों का परंपरा है कि यहां कोई भी आहिंदू प्रवेश नहीं कर सकते हैं लेकिन हमारी सनातन परंपरा को इसने तोड़ने का काम किया है हम लोग सरकार को चेतावनी दे रहे हैं, हमारी आस्था को ठेस पहुंचाने का काम किया गया है इसके लिए पूरी तरह से जिम्मेदार जिला प्रशासन और सरकार है, सबसे बड़े जिम्मेवार गया के रहने वाले व जदयू के वरिष्ठ नेता और नीतीश कुमार के करीबी बताए जा रहे हैं चंदन सिंह की बड़ी लापरवाही है क्योंकि वह खुद विष्णुपद मंदिर के पास के ही रहने वाले हैं और धार्मिक न्यास बोर्ड के सदस्य है बावजूद चंदन सिंह के द्वारा उसे रोका नहीं गया ,एक बड़ी लापरवाही चंदन सिंह के द्वारा की गई है, प्रेमनाथ टाइयां ने कहा कि सरकार को इसको लेकर माफी मांगनी चाहिए, नहीं तो अनुच्छेद 15 के अंदर 295 298 का मामला मुकदमा दायर हो सकता हैं।

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