हाजीपुर से ऋषभ की रिपोर्ट :-
नगर क्षेत्र के पुस्तकालय के सामने राजकीय मध्य विद्यालय में कई घंटों तक हंगामा चलता रहा। बच्चों ने बताया कि मिड डे मिल में छिपकली निकला है। और खाना विद्यालय परिसर में ही फेंका गया है। वही प्राचार्य टैगोर जी ने बताया कि ऐसा कुछ नहीं है। खाना जांच पड़ताल कर के और सुरक्षित रखा जाता है। और खाना को खुद खाकर संतुष्ट होने के बाद ही लिया जाता है। विद्यालय में दो रसोईया भी है। नीलम देवी और माला देवी। दोनों ने बताया कि रोज की भांति आज भी खाना देख कर ही ठेकेदार से लिया गया था। लेकिन पता नही कैसे यह अफवाह फैलाया जा रहा हैं। वहीं जैसे ही छिपकिली खाना में निकलने की बात निकली की सभी बच्चे और बच्चों के परिजन स्कूल में हंगामा करने लगे। इसी दौरान कुछ बच्चों के पेट में दर्द की शिकायत हुई तो फौरन रेफरल अस्पताल ले जाया गया। देखा देखी लगभग दो दर्जन बच्चे अस्पताल पहुंच गये। जहां डा जयराम,और अस्पताल प्रभारी सरिता शंकर ने अपने देख रेख में बच्चों का जांच पड़ताल किया। लेकिन किसी बच्चे में कोई बीमारी नहीं निकली। सभी बच्चे छिपकिली के नाम पर दहशत में आ गये थे। इस मामले में डा सरिता शंकर ने बताया कि सभी बच्चे डर गये थे। इन्हें कोई बीमारी नहीं है। वैसे सभी बच्चों को अच्छी तरह जांच कर लिया गया है। और ओ आर एस दिया गया है। लेकिन एक बच्चे को हाजीपुर सदर अस्पताल रेफर किया गया है। यह जांच करने के लिए कि क्या खिचड़ी खाने से बच्चे बीमार पड़े हैं। या कोई अफवाह फैलाया गया है। लेकिन सूत्रों की माने तो स्कूल मे मिलने वाली मिड डे मील स्कूल परिसर में नहीं बनाया जाता है। मिड डे मील का ठेकेदार होते हैं। और वही ठेकेदार मिड डे मील तैयार करवा कर प्रत्येक स्कूल में देते हैं। यह भी हो सकता है। की ठेकेदार के द्वारा दिए गए मिड डे मील में छिपकली रहा हो मामले को दबाने के लिए छिपकली की बात को प्रशासनिक स्तर पर छुपाया जा रहा हैं। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि जब स्कूल में रसोईया बहाल है। तो फिर स्कूल में खाना क्यों नहीं बनाया जाता है। ऐसे मे ठेकेदार और स्कूल की मिलीभगत होने की सक जताया जा रहा हैं। या फिर इस घटना के पीछे भी ठेकेदार या असामाजिक तत्वों का कुछ साजिश है। जिसकी जांच होनी चाहिए।




