रवि शंकर शर्मा!
दुनिया के पहले बाल रूप में शनिदेव की स्थापना बाढ़ के उमानाथ गंगा घाट पर स्थित शनि मंदिर में 2008 में की गई थी।
इस मंदिर में बाल शनिदेव की स्थापना सनी सिगनापुर से शिला लाकर की गई थी।
यहां जो बाल शनिदेव हैं वह नवग्रह यंत्र पर स्थापित किए गए हैं, ऐसी मान्यता है कि बाल शनि देव के दर्शन मात्र से शनि दोष से जातकों को मुक्ति मिल जाती है।
अब बाल शनिदेव के 10 रूपों का कायाकल्प और प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन किया जा रहा है,जिससे इस मंदिर का प्रभाव और अधिक बढ़ जाएगा।
पूज्य संत नागा बाबा ने बताया कि 2 अप्रैल को बाल शनिदेव के 10 रूपों का कायाकल्प और प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन किया जाना है इसे लेकर मंदिर परिसर को पूरी तरह से सजाया जा रहा है नागा बाबा यह भी कहते हैं कि जब शनिदेव की इच्छा प्रबल होती है तो जातक यहां आते हैं और जो जातक यहां पहुंच जाते हैं उनके सभी सभी शनि दोष कट जाते हैं यानी शनिदेव की वक्र दृष्टि से उसे मुक्ति मिल जाती है और शनि देव की कृपा प्राप्त हो जाती है।
Byte:- नागा बाबा (मुख्य पुजारी, बाल शनिदेव मंदिर, बाढ़)




