संवाद सूत्र शंखनाद
मूर्ति निर्माण में जुड़े कारीगर
अपनी कला को बनाया जीविकोपार्जन का साधन
जयनगर। कला किसी का मोहताज नहीं होता अगर हाथ में हुनर हो तो मंजिलें खुद ब खुद मिल जाती है। हाथों की हुनर व्यक्तित्व की पहचान होती है ऐसा ही इन दिनों जयनगर क्षेत्र में देखने को मिल रहा है रोहित कुमार अपने कला के माध्यम से जीवंत प्रतिमा बना रहे हैं ऐसा लगता है मानो प्रतिमा बोलने बोलने को है पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि लगभग 20 वर्षों से मैं इस कार्य में लगा हुआ हूं और विभिन्न पूजा के अवसर पर मैं मूर्तियां बनाता हूं मेरे द्वारा बनाई गई मूर्तियां पूरे क्षेत्र में प्रसिद्ध है उन्होंने कहा कि 1500 से लेकर 2500 तक की मूर्ति मैं बना रहा हूं कोरोना काल में थोड़ी बहुत परेशानी हुई है कई जगह पूजा का आयोजन नहीं हो रहा है जिसे लेकर चिंतित भी हैं इन्हीं मूर्तियों को बेचकर मेरे परिवार वालों का जीवन यापन होता है परंतु विगत 2 वर्षों से कोरोना नील हम लोगों के व्यवसाय को धीमा कर दिया है। माता रानी का कृपा रहेगा तो अच्छा खासा व्यवसाय हो जाएगा प्रखंड के पिपचो, परसाबाद, जयनगर,बांझेडीह खरियोडीह समेत कई जगहों पर मूर्ति बनाने का काम किया जा रहा है।




