रिपोर्ट पुरुषोत्तम कुमार
महादलित वर्गीकरण को लेकर अरुण भारती ने जीतन राम मांझी पर उठाए सवाल, पूछा- 2007 के फैसले का आधार क्या था।
जमुई दलितों के वर्गीकरण और महादलित श्रेणी को लेकर जमुई सांसद अरुण भारती ने पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी पर सवाल उठाए हैं। गुरुवार को जमुई पहुंचे सांसद ने परिसदन में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि उन्होंने जीतन राम मांझी से एक नीतिगत सवाल पूछा था और उसका जवाब भी नीतिगत तरीके से मिलना चाहिए था। लेकिन, सवाल का नीतिगत जवाब देने के बजाय व्यक्ति और परिवार पर टिप्पणी की जा रही है। उन्होंने कहा कि उनका सवाल आज भी कायम है।
सांसद ने कहा कि वर्ष 2007 में बिहार में दलितों का वर्गीकरण दलित और महादलित श्रेणी में किया गया था। उस समय जीतन राम मांझी एससी-एसटी कल्याण मंत्री थे और बाद में बिहार के मुख्यमंत्री भी बने। उनके पुत्र संतोष कुमार सुमन के पास भी लंबे समय तक संबंधित विभाग रहा। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि जिन जातियों को महादलित श्रेणी में शामिल किया गया था, उन्हें इसका कितना लाभ मिला। क्या सरकार ने इसका कोई आकलन या समीक्षा की है।
अरुण भारती ने कहा कि एक समय पासी, पासवान, रविदास और रजक समाज को महादलित श्रेणी से बाहर कर दिया गया था। उन्होंने सवाल उठाया कि इन चार जातियों को महादलित श्रेणी से बाहर करने का आधार क्या था? क्या इसके लिए कोई सर्वे कराया गया था या किसी रिपोर्ट के आधार पर यह निर्णय लिया गया था।
उन्होंने कहा कि अब इन्हीं चार जातियों को दोबारा महादलित श्रेणी में शामिल किया गया है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि वर्तमान निर्णय सही है तो वर्ष 2007 में लिया गया फैसला क्या गलत था? सांसद ने यह भी पूछा कि महादलित श्रेणी से बाहर रहने के दौरान इन जातियों को योजनाओं और सरकारी सुविधाओं से जो कथित नुकसान हुआ, उसकी भरपाई कौन करेगा। इधर, अरुण भारती के परिसदन से रवाना होने के दौरान लोजपा (रामविलास) के कुछ कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की। कार्यकर्ताओं ने जीतन राम मांझी और प्रफुल्ल मांझी के खिलाफ नारे लगाए। इस दौरान कुछ देर के लिए मौके पर राजनीतिक माहौल गरमा गया।
वाइट –जमुई लोकसभा सांसद अरुण भारती




