बाढ़ के कारण विस्थापित बच्चे अस्थायी स्कुल में कर रहे पढ़ाई और मनोरंजन!

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रिपोर्ट – निभाष मोदी!

बाढ़ ने घर छीना तो राहत शिविर बना बच्चों का स्कूल! गाने, एक्शन और मनोरंजन के बीच चल रही पढ़ाई, डेस्क-बेंच से लेकर ब्लैकबोर्ड तक की पूरी व्यवस्था

भागलपुर। बाढ़ का पानी भले ही लोगों के घरों और जिंदगी की रफ्तार को प्रभावित कर रहा हो, लेकिन नन्हे बच्चों की पढ़ाई का कारवां नहीं रुका है। भागलपुर जिला अंतर्गत जगदीशपुर अंचल के बरारी स्थित पॉलिटेक्निक कॉलेज मैदान में बनाए गए बाढ़ राहत शिविर में इन दिनों एक ऐसी अनोखी तस्वीर देखने को मिल रही है, जो आपदा के बीच उम्मीद, संवेदनशीलता और शिक्षा की मिसाल बन गई है।राहत शिविर में जहां बाढ़ प्रभावित परिवार सुरक्षित ठिकाने पर रह रहे हैं, वहीं शिक्षा विभाग, बिहार सरकार ने बच्चों के लिए अस्थायी विद्यालय की पाठशाला शुरू कर दी है। यानी जिन बच्चों के स्कूल बाढ़ के कारण छूट गए, उनके लिए राहत शिविर ही फिलहाल स्कूल बन गया है।सुबह होते ही राहत शिविर में बच्चों की चहल-पहल शुरू हो जाती है। करीब साढ़े नौ बजे चेतना सत्र आयोजित किया जाता है। बच्चे विद्यालय की तरह कतार में खड़े होते हैं। प्रार्थना के बाद शुरू होती है पढ़ाई की ऐसी प्रक्रिया, जिसमें किताबों के साथ-साथ गाने, एक्शन, अभिनय और मनोरंजक गतिविधियों का भी सहारा लिया जा रहा है।सुनीता, पीएस लालूचक, चंपानगर ने बताया कि जिस तरह सामान्य दिनों में विद्यालय में चेतना सत्र के बाद अलग-अलग विषयों की पढ़ाई कराई जाती है, उसी तरह यहां भी बच्चों की दिनचर्या तैयार की गई है। बच्चों को सभी विषयों की पढ़ाई कराई जा रही है, ताकि बाढ़ के कारण उनकी शिक्षा की निरंतरता प्रभावित न हो।
इस अस्थायी विद्यालय की खासियत सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि पढ़ाने की आकर्षक और मनोरंजक शिक्षण प्रणाली है। बच्चों का मन पढ़ाई में लगा रहे और आपदा के माहौल का उनके मन पर नकारात्मक असर कम हो, इसके लिए शिक्षकों द्वारा गाने-बजाने, एक्शन और एक्टिंग जैसी गतिविधियों के माध्यम से पाठ को रोचक बनाया जा रहा है।
राहत शिविर में रह रहे बच्चों को किताबें भी वितरित की गई हैं। वहीं, विद्यालय जैसा वातावरण देने के लिए डेस्क-बेंच और ब्लैकबोर्ड की व्यवस्था की गई है। ऐसे में बच्चों को यह महसूस कराने की कोशिश की जा रही है कि वे किसी अस्थायी शिविर में नहीं, बल्कि अपने विद्यालय की कक्षा में बैठे हैं।
बाहर बाढ़ का पानी लोगों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है, लेकिन इसी राहत शिविर के भीतर ब्लैकबोर्ड पर लिखे अक्षर बच्चों के भविष्य की नई कहानी लिख रहे हैं। कभी प्रार्थना की आवाज, कभी गीतों की धुन और कभी बच्चों के एक्शन-एक्टिंग से पूरा शिविर जीवंत नजर आता है।
वही शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य बेहद स्पष्ट है—बाढ़ के कारण बच्चों की पढ़ाई पर ब्रेक न लगे और उनका मन भी सकारात्मक गतिविधियों में लगा रहे। आपदा के कठिन दौर में शिक्षा विभाग की यह पहल बच्चों को सिर्फ किताबों से नहीं जोड़ रही, बल्कि उनके चेहरे पर मुस्कान और भविष्य के प्रति विश्वास भी कायम रखने का प्रयास कर रही है।
कह सकते हैं कि बाढ़ के बीच यह राहत शिविर अब सिर्फ आश्रय का ठिकाना नहीं, बल्कि बच्चों के सपनों की अस्थायी पाठशाला बन चुका है—जहां मुश्किल हालात के बीच भी पढ़ाई, मुस्कान और उम्मीद साथ-साथ चल रही है।

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