विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर भाजपा प्रदेश कार्यालय में समारोह, संजय सरावगी हुए शामिल!

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:- रवि शंकर अमित!

राजनीतिक स्वार्थ के लिए भारत माता की छाती पर खींची गई विभाजन की लकीर का दर्द देश कभी नहीं भूल सकता : संजय सरावगी

विभाजन की विभीषिका केवल इतिहास का अध्याय नहीं, आने वाली पीढ़ियों के लिए चेतावनी : संजय सरावगी

राष्ट्र की एकता, अखंडता और संप्रभुता पर कभी आंच नहीं आने देंगे भाजपा कार्यकर्ता : प्रदेश अध्यक्ष

पटना, 14 अगस्त। भाजपा बिहार प्रदेश कार्यालय में आज विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर श्रद्धांजलि एवं स्मृति समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, प्रदेश संगठन महामंत्री भीखू भाई दलसानिया सहित पार्टी के वरिष्ठ नेता, मंत्री, पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

इस अवसर पर वर्ष 1947 में देश के विभाजन के दौरान अपने प्राण गंवाने वाले तथा विस्थापन की असहनीय पीड़ा झेलने वाले अनगिनत निर्दोष नागरिकों की स्मृति को नमन किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि 14 अगस्त भारतीय इतिहास के उस काले अध्याय का साक्षी है, जब राजनीतिक स्वार्थ और सत्ता की आकांक्षा के कारण मां भारती की छाती पर विभाजन की लकीर खींच दी गई। विभाजन केवल नक्शे पर खींची गई एक रेखा नहीं थी, बल्कि लाखों परिवारों और करोड़ों लोगों के जीवन पर चला ऐसा खंजर था, जिसने उन्हें अपनी पुश्तैनी जमीन, घर, व्यापार और स्मृतियां छोड़कर अनजान रास्तों पर जाने के लिए विवश कर दिया।

उन्होंने कहा कि विभाजन की त्रासदी में माताओं-बहनों ने अकल्पनीय यातनाएं सहीं और बड़ी संख्या में लोगों ने अपने प्राण गंवाए। यह किसी प्राकृतिक आपदा का परिणाम नहीं था, बल्कि उस समय की राजनीतिक परिस्थितियों और नेतृत्व के निर्णयों का परिणाम था। उन्होंने कहा कि देश के इतिहास के इस दर्द को लंबे समय तक भुलाने का प्रयास किया गया, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लेकर उन करोड़ों पीड़ितों की पीड़ा को देश के सामने रखने का महत्वपूर्ण कार्य किया।

संजय सरावगी ने कहा कि 14 अगस्त 2021 से देशभर में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल अतीत को याद करना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को यह समझाना भी है कि जब राष्ट्रहित पर राजनीतिक स्वार्थ हावी होता है तो देश और समाज को इसकी कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है।

उन्होंने कहा कि भाजपा की वैचारिक यात्रा अखंड भारत के संकल्प और राष्ट्र प्रथम के मंत्र से प्रारंभ होती है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने राष्ट्र की एकता और अखंडता को सर्वोच्च महत्व देने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि आज भी तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति के माध्यम से समाज को बांटने की कोशिश करने वाली ताकतों से सावधान रहने की आवश्यकता है।

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि बिहार की धरती ने हमेशा राष्ट्रवाद को शक्ति प्रदान की है। विभाजन के बाद अपना सर्वस्व गंवाने वाले लोगों ने अपने पुरुषार्थ और परिश्रम से पुनः अपना संसार खड़ा किया। उनका संघर्ष और साहस पूरे देश के लिए प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि आज विकसित भारत और विकसित बिहार के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ते हुए हमें संकल्प लेना होगा कि देश की एकता और अखंडता को कमजोर करने वाली परिस्थितियों को दोबारा जन्म नहीं लेने देंगे।

उन्होंने युवाओं से विभाजन की विभीषिका से जुड़े संस्मरणों और इतिहास का अध्ययन करने का आह्वान करते हुए कहा कि नई पीढ़ी को यह जानना चाहिए कि देश के विभाजन का दर्द क्या था और उससे क्या सीख मिलती है।

इस अवसर पर पूर्व विधान पार्षद किरण घई, विधायक संजय गुप्ता, प्रदेश महामंत्री सरोज रंजन पटेल, राजू झा, प्रदेश उपाध्यक्ष मनोज सिंह, ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष प्रमोद चंद्रवंशी, वरिष्ठ नेता सुबोध तुरहा, महानगर जिलाध्यक्ष रूप नारायण मेहता सहित प्रदेश पदाधिकारी, ओबीसी मोर्चा के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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