रिपोर्ट- अमित कुमार!
बिहार सरकार के नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा ने झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों पर हुई लाठीचार्ज को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
और कांग्रेस तथा अन्य विपक्षी दलों पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप ल गाया। उन्होंने कहा कि छात्रों और युवाओं के मुद्दे पूरे देश के लिए अहम हैं, लेकिन विपक्ष अलग-अलग राज्यों में इन्हें अलग नजरिए से देखता है। दिल्ली में जब छात्र सड़कों पर उतरे थे तब कांग्रेस और विपक्ष के बड़े नेता उनके समर्थन में पूरी प्रखरता से खड़े थे, जबकि आज झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी से जुड़े सवालों को लेकर छात्र आंदोलन कर रहे हैं तो विपक्ष उनकी सुध लेने को तैयार नहीं है। नीतीश मिश्रा ने सवाल उठाया कि क्या झारखंड में आंदोलन करने वाले छात्र देश के छात्र नहीं हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में छात्रों को अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखने का अधिकार है और ऐसे में दिल्ली और झारखंड के आंदोलनों को लेकर विपक्ष के रवैये में अंतर क्यों है यह सवाल आज युवाओं के मन में भी है। राजनीतिक सुविधा के अनुसार मुद्दों पर स्टैंड बदलना विपक्ष की विरोधाभासी नीति को दिखाता है। संसद के संदर्भ में उन्होंने कहा कि पिछले करीब पंद्रह दिनों से कार्यवाही लगातार बाधित की जा रही है और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने साफ कहा है कि सरकार हर विषय पर चर्चा और जवाब देने के लिए तैयार है। संसद नियमों और परंपराओं के अनुसार चलती है इसलिए विपक्ष को अपने मुद्दे सदन में रखने चाहिए और सरकार का जवाब धैर्य से सुनना चाहिए। बार-बार मुद्दे बदलना और कार्यवाही बाधित करना इस बात का संकेत है कि विपक्ष गंभीर बहस नहीं चाहता।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि उनका सवाल छात्र आंदोलन के अधिकार पर नहीं बल्कि विपक्ष के अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग रुख पर है। अगर कोई विषय छात्रों से जुड़ा है तो उस पर हर जगह एक समान दृष्टिकोण होना चाहिए। उन्होंने बिहार में नगर निकाय कर्मियों और कार्यपालक पदाधिकारियों की हड़ताल का उदाहरण देते हुए कहा कि बातचीत के जरिए समाधान निकाला गया था क्योंकि लोकतंत्र की खूबसूरती संवाद और विमर्श में ही है। अंत में उन्होंने कहा कि विपक्ष की यह विरोधाभासी नीति देश की जनता और खासकर युवाओं के सामने है जो यह देख रहे हैं कि राजनीतिक सुविधा के हिसाब से विपक्ष अपना रुख कैसे बदलता है।




