रिपोर्ट – आशुतोष पांडेय!
आरा/बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग (BSUSC) द्वारा संविदा के आधार पर असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर एक अभ्यर्थी ने गंभीर आरोप लगाए हैं। आरा निवासी डॉ. सुष्मिता ने आरोप लगाया है कि 25 जुलाई 2026 को समाजशास्त्र (Sociology) विषय के लिए पटना के शास्त्रीनगर स्थित दीप नारायण सिंह रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ कोऑपरेटिव मैनेजमेंट में आयोजित साक्षात्कार के दौरान उन्हें उनके वैध आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) प्रमाणपत्र के बावजूद ईडब्ल्यूएस श्रेणी में इंटरव्यू नहीं देने दिया गया।
डॉ. सुष्मिता का कहना है कि उनका ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र विधिसम्मत तरीके से निर्गत था और सभी आवश्यक दस्तावेज भी उपलब्ध थे। इसके बावजूद दस्तावेजों की जांच के दौरान आयोग के अधिकारियों द्वारा उन पर जनरल (अनारक्षित) श्रेणी में इंटरव्यू देने का दबाव बनाया गया। उनका आरोप है कि परिस्थितियों के दबाव में उन्हें ईडब्ल्यूएस श्रेणी छोड़कर जनरल श्रेणी में ही साक्षात्कार देना पड़ा।
डॉ. सुष्मिता के अनुसार उनका इंटरव्यू संतोषजनक रहा, लेकिन हाल ही में जारी परिणाम में उनका चयन नहीं हो सका। उनका दावा है कि यदि उन्हें ईडब्ल्यूएस श्रेणी में साक्षात्कार देने का अवसर मिलता और उसी आधार पर मूल्यांकन किया जाता, तो उनके चयन की संभावना अधिक थी।
उन्होंने कहा कि आयोग की इस कार्रवाई से उनके संवैधानिक एवं वैधानिक अधिकारों का हनन हुआ है। अब वह पूरे मामले को लेकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगी और आयोग के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगी। उन्होंने निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई तथा ईडब्ल्यूएस श्रेणी के आधार पर न्याय दिलाने की मांग की है।




