रिपोर्ट – संतोष तिवारी
बनारसी ठग बिहार के छात्रों को ठग रहा” – पैट 2023-24 की मेधा सूची में गड़बड़ी का आरोप, छात्र नेता बोले सीसीटीवी से खुलेगा सच
बिहार विश्वविद्यालय में पैट 2023-2024 की मेधा सूची में हुई धांधली के खिलाफ छात्रों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। इस मामले में RJD छात्र नेता चंदन यादव ने आवाज उठाई, जिसके परिणामस्वरूप विश्वविद्यालय के कुलपति ने उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई। इससे छात्रों में असंतोष और गहरा गया है।
आज, चंदन यादव और कई अन्य छात्रों ने विश्वविद्यालय के धरना स्थल पर एक संवाददाता सम्मेलन आयोजित किया। इस सम्मेलन में उन्होंने पत्रकारों को बताया कि छात्र हित के लिए आवाज उठाने पर कुलपति ने उनके खिलाफ FIR दर्ज कराई है। चंदन यादव ने स्पष्ट किया कि इस प्राथमिकी से छात्र हित की आवाज दबने वाली नहीं है।
चंदन ने बताया कि पैट 2023-2024 की मेधा सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई है। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे की शिकायत राज्य भवन जाकर करनी पड़ी, लेकिन सुधार के नाम पर स्थिति और भी खराब हो गई। इससे छात्रों में गहरी निराशा और गुस्सा है।
छात्र नेताओं ने निर्णय लिया है कि वे अब अनिश्चितकालीन हड़ताल और धरना प्रदर्शन करेंगे। चंदन यादव ने जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन से अपील की है कि जो प्राथमिकी दर्ज की गई है, उसकी निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने कहा, “सीसीटीवी फुटेज से दूध का दूध और पानी का पानी अलग हो जाएगा।”
इस मामले में चंदन यादव का कहना है कि बिहार के विद्यार्थियों के साथ ठगी की जा रही है। उन्होंने कहा, “बनारसी ठग बिहार के विद्यार्थियों को ठगने का काम कर रहा है।”
छात्रों ने इस मुद्दे पर एकजुटता दिखाई है और विभिन्न छात्र संगठनों ने चंदन यादव के समर्थन में आवाज उठाई है। उन्होंने कहा कि जब तक इस मामले में उचित कार्रवाई नहीं होती, वे अपना विरोध जारी रखेंगे।
छात्रों का यह आंदोलन केवल एक विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे बिहार में शिक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर उठ रहा है। चंदन ने कहा कि यह लड़ाई केवल उनकी नहीं, बल्कि सभी छात्रों की है।
वर्तमान में, छात्रों का यह आंदोलन एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच चुका है। वे अपनी आवाज को सुनाने के लिए तैयार हैं, और उनका लक्ष्य है कि शिक्षा प्रणाली में सुधार हो। छात्र नेताओं ने यह भी कहा कि वे किसी भी प्रकार के दबाव में नहीं आएंगे और अपने हक के लिए लड़ते रहेंगे।
इस बीच, विश्वविद्यालय प्रशासन ने अभी तक इस घटना पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। छात्रों का यह आंदोलन अब एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा करता है: क्या बिहार की शिक्षा प्रणाली में सुधार होगा, या छात्रों की आवाजें इसी तरह दबाई जाएंगी?
समाज के विभिन्न हिस्सों से छात्रों के समर्थन में आवाजें उठ रही हैं। कई सामाजिक संगठन और छात्र संघ इस मुद्दे को उठाने के लिए आगे आए हैं। यह स्पष्ट है कि छात्रों के इस आंदोलन ने बिहार की राजनीति और शिक्षा प्रणाली को एक नई दिशा देने का काम किया है।
छात्रों ने यह सुनिश्चित किया है कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन वे सख्त और स्पष्ट हैं कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, वे अपने संघर्ष को जारी रखेंगे। यह आंदोलन न केवल बिहार के छात्रों के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक संदेश है कि जब छात्र एकजुट होते हैं, तो वे बदलाव ला सकते हैं।
इस प्रकार, बिहार विश्वविद्यालय में छात्र आंदोलन एक महत्वपूर्ण घटना बन गई है, जो आने वाले समय में शिक्षा और राजनीति दोनों पर बड़ा प्रभाव डाल सकती है। छात्रों की एकजुटता और साहस यह दर्शाता है कि वे अपने अधिकारों के लिए लड़ने के लिए तैयार हैं।
बाइट:- चंदन यादव राजद छात्र नेता बिहार विश्वविद्यालय




