रिपोर्ट – डॉ अनमोल कुमार
गया जी। नर ही नारायण है। दरिद्र नारायण की सेवा से भी लौकिक और पारलौकिक दोनों लोको में व्यक्ति को स्वर्गिक आनंद की प्राप्ति होती है। सनातन धर्म उच्च नीच ,जात पात और अगड़े पिछड़े की परिभाषा से मुक्त है।सनातन धर्म में दरिद्र नारायण को भोजन करना सर्वोत्तम पुण्य माना गया है। यह कहना है अंतर्राष्ट्रीय संत बौद्धिक मंच के राष्ट्रीय महासचिव तथा श्री गौरी शंकर बैकुंठ धाम न्यास समिति के कोषाध्यक्ष पीठाधीश्वर डॉक्टर स्वामी श्यामा नंद जी महाराज ने कहा।
डॉ श्यामानंद जी महाराज गया में धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए सनातन धर्म नारायण सहभोज कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। पीठाधीश्वर श्री श्यामा नंद ने कहा कि सनातन धर्म से ही संस्कार संस्कृति और सभ्यताओं की रचना हुई है।
अंतर्राष्ट्रीय संत बौद्धिक मंच बिहार प्रदेश के मुख्य संगठन महामंत्री डॉ अनमोल कुमार ने सनातन संस्कृति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सनातन धर्म और कर्म का संतुलित परिभाषा सनातन धर्म के वेद पुराणों में ही समाहित है। डॉ अनमोल ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय संत बौद्धिक मंच के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी स्वदेशानंद जी महाराज ने सनातन धर्म की रक्षा के लिए लंबे समय तक मां नर्मदा की हजारों किलोमीटर परिक्रमा कर विश्व के सनातनियों को एकजुट करने हेतु शंखनाद किया।
अनमोल ने बताया कि स्वामी स्वदेश आनंद जी 2026 के अंत तक 25 लाख सनातनियों को संगठन से जुड़ने का संकल्प लिया है और इसके लिए वे भारत यात्रा पर भी निकलने वाले हैं ।इस सहभोज में हजारों दरिद्र नारायण को संगत पंगत के माध्यम से भोजन कराया गया।
इसका आयोजन अंतर्राष्ट्रीय संत बौद्धिक मंच बिहार प्रदेश के अध्यक्ष, डॉ राकेश दत्त मिश्रा ने किया। इस अवसर पर सहयोग करने वाले प्रदेश पदाधिकारियों में डॉ भोला प्रसाद ( अधिवक्ता), रमेश चौबे, राजेश कुमार झा, अंकेश कुमार, अवधेश कुमार शर्मा आदि शामिल रहे।




