रिपोर्ट- सुमित कुमार!
-मुंगेर के पत्रकारिता और फोटोग्राफी जगत की एक सशक्त हस्ती, 75 वर्षीय सुबोध सागर का शनिवार की रात अचानक सीने में दर्द उठने के कुछ देर बाद ही निधन हो गया। इस दुखद समाचार के फैलते ही पूरा मुंगेर शोक की लहर में डूब गया। सोशल मीडिया पर उनके असंख्य शुभचिंतकों ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
अनोखी श्रद्धांजलि: पीपल के पत्तों पर उकेरी तस्वीर
देश के प्रख्यात अंतरराष्ट्रीय सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र ने सुबोध सागर को एक अनोखे अंदाज में श्रद्धांजलि दी। मधुरेंद्र ने तीन सेंटीमीटर की दुनिया की सबसे छोटी पीपल के हरे पत्तों पर सुबोध सागर की तस्वीर उकेरी। उन्होंने कहा, “सुबोध सागर जैसे निष्पक्ष और कर्मठ पत्रकार का जाना पत्रकारिता जगत के लिए अपूर्णीय क्षति है। उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।”
पत्रकारिता में एक दीर्घकालिक योगदान
सुबोध सागर का नाम पटना की साप्ताहिक पत्रिका ‘समरक्षेत्र’, भागलपुर के दैनिक ‘नई बात’, और तत्कालीन हिंदुस्तान मीडिया लिमिटेड जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से वर्षों तक जुड़ा रहा। एक साल पूर्व उन्होंने अपनी पत्नी को खोया था, और अब स्वयं भी इस संसार को अलविदा कह गये।
गंगा पुल आंदोलन से रहा गहरा नाता
मुंगेर गंगा पुल आंदोलन के साथ सुबोध सागर का गहरा जुड़ाव रहा। वे पुल को क्षेत्रीय विकास की धुरी मानते थे। उन्होंने जागृति आंदोलन की गतिविधियों को न केवल अपने कैमरे में संजोया, बल्कि समाचार पत्रों के माध्यम से जनता तक प्रभावी ढंग से पहुँचाया। आज इस पुल का लाभ हर नागरिक उठा रहा है, जिसके लिए उनका योगदान अविस्मरणीय रहेगा।
बाइट: मधुरेंद्र, अंतरराष्ट्रीय सैंड आर्टिस्ट




