टीएनबी कॉलेज के प्रशाल में मनाया गया राजभाषा हिंदी संकल्प दिवस समारोह!

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धीरज शर्मा के साथ निभाष मोदी भागलपुर

हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है ऐसा इसलिए है क्योंकि इस दिन भारत की संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में लिखी गई हिंदी भाषा को भारत गणराज्य की आधिकारिक भाषा घोषित किया था ,भारत की संविधान सभा ने 14 सितंबर 1949 को भारत गणराज्य की आधिकारिक भाषा के रूप में हिंदी को अपनाया!
प्रत्येक राष्ट्र में वैसी भाषा होती है जो राष्ट्र के सभी व्यापारियों के लिए सर्वमान्य हो, इसी भाषा के द्वारा राष्ट्र के सब कार्य व्यवहार चलते हैं, सरकारी दफ्तरों कचहरीओं आदि में इसी भाषा का प्रयोग होता है ,इसी भाषा को राष्ट्र की राष्ट्रभाषा कहा जाता है !वास्तव में राष्ट्रभाषा ही राष्ट्र का प्राण होता है, इसी के आधार पर देश का उत्थान और पतन निर्भर करता है! इस भाषा में राष्ट्र की भावना व्यक्त होती है इसी के द्वारा राष्ट्र के नागरिकों में ज्ञान का संचार होता है! अतः राष्ट्रभाषा का चुनाव करते समय बड़ी सावधानी की आवश्यकता होती है ,इसके उत्थान और विकास के लिए राष्ट्र को उचित व्यवस्था करनी पड़ती है इसी क्रम में हमारे पूरे भारतवर्ष में 14 सितंबर को राष्ट्रभाषा हिंदी संकल्प दिवस मनाया जा रहा है।
आज के इस राष्ट्रभाषा हिंदी संकल्प दिवस 2021 का यह कार्यक्रम तेज नारायण बनेली महाविद्यालय प्रशाल में राजभाषा हिंदी संकल्प दिवस समारोह का आयोजन हिंदी विभाग टीएनबी कॉलेज भागलपुर के तत्वावधान में किया गया !अतः इस कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्रधानाचार्य प्रोफेसर डॉ संजय कुमार चौधरी ने किया, मुख्य अतिथि प्रोफेसर डॉ योगेंद्र तथा विशिष्ट अतिथि प्रोफ़ेसर डॉ अंजनी कुमार राय एवं प्रोफेसर आलोक कुमार चौबे थे इस कार्यक्रम के निवेदक के रूप में सुबोध मंडल जो हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष हैं उन्होंने किया, कार्यक्रम में हिंदी को लेकर सब ने अपनी अपनी प्रतिक्रिया दी साथ ही हिंदी विभाग के छात्र-छात्राओं ने भी कुलगीत की प्रस्तुति दी, हिंदी पर निबंध, हिंदी पर कविता एवं गीत की प्रस्तुति कर सबों का मन मोह लिया!

14 सितंबर अर्थात हिंदी दिवस, बताते चलें सन 1947 में स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद संविधान का निर्माण हुआ ,हमारे संविधान निर्माताओं के सामने एक विचारणीय प्रश्न था कि किस भारतीय भाषा को राष्ट्रभाषा के पद पर सुशोभित किया जाए ,भारत एक विशाल देश है यहां के विभिन्न प्रांतों में विभिन्न भाषाएं बोली जाती हैं, उनमें से किसको यह महत्व दिया जाए यह एक भारी समस्या थी! विचारवान संविधान निर्माताओं ने इस विषय में गंभीरता से विचार किया और वह इस निर्णय पर पहुंचे कि हिंदी ही एक ऐसी भाषा है जो सर्वथा राष्ट्रभाषा के महत्वपूर्ण पद पर अलंकृत होने की क्षमता रखती है तभी से 14 सितंबर को हम हिंदी दिवस के रूप में मनाते हैं।

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