अमरदीप नारायण प्रसाद:-
समस्तीपुर जिले के धर्मपुर मे बाबा साहब जिंदाबाद मनुस्मृति मुर्दाबाद बोल पाचसी जिंदाबाद के नारों के साथ मनुस्मृति जलाया गया!मनुस्मृति दिवस के अवसर पर एक बार फिर उसे दोहराते हुए बाबा साहब के पद चिन्हो पर चलते हुए मनु स्मृति को जलाया और इसका पुर जोड़ विरोध किया!बहुजनों का मानना हैँ की समाज मे एकता भाईचारा के बजाय समय को बाटने का काम मनु स्मृति मे कही गई हैँ और समाज को चार वर्गों मे बाटने का काम किया हैँ जो सरासर गलत हैँ इसे हमलोग नहीं मानते हैँ देश और समाज संविधान से चलेगा न की मनुस्मृति से मनुस्मृति मे एक ही गलती के लिए अलग अलग दंड का प्रावधान हैँ जो बिलकुल गलत हैँ!मनुस्मृति मे बहुजनों को बढ़ने सुनने और बोलने पर कान मे सीसा पिघलाकार डालने जीभ काटने जैसे बात लिखी हुई हैँ इसलिए बाबा साहब ने पहली बार अपने साथियो के साथ 25 दिसंबर 1927 को मनुस्मृति को जलाए थे तब से लगातार ये सिलसिला जाड़ी हैँ मौके पर सामाजिक कार्यकर्त्ता सावन कुमार, रौशन कुमार, रमेश कुमार,रोहित कुमार, राजन कुमार, विमल पासवान, कृष्णा, कुंदन, संजीत, विनोद सह इत्यादि दजनों लोग मौजूद थे!




