रिपोर्टर — राजीव कुमार झा
सदर अनुमंडल पदाधिकारी अश्वनी कुमार ने बताया कि ऐसे और असामाजिक तत्वों के लोगों पर होगी कार्रवाई
मधुबनी जिले के राजनगर थाना अंतर्गत रमपट्टी पारा मेडिकल संस्थान में घुसकर
बाहरी या असामाजिक तत्वों के द्वारा मारपीट एवं तोड़-फोड़ करने को गंभीरता से लेते हुए संबंधित राजनगर थाना में केस दर्ज कराया है। केस दर्ज कराने वाले
त्रोतपुर थाना राघोपुर, जिला-सुपौल का रहनेवाले डॉक्टर निरंजन कुमार जायसवाल, पिता उपेन्द्र बौधरी वर्तमान पता सी एच सी राजनगर का चिकित्सा प्रभारी तथा पारा मेडिकल संस्थान रामपट्टी का प्रिंसिपल के अतिरिक्त प्रभार में रहते हुए उन्होंने राजनगर थाना में एक आवेदन देकर केस दर्ज कराते हुए बताया है कि
15/फरवरी/24 को समय करीब 10:00 बजे रात्रि में मुझे पारा मेडिकल संस्थान रामपट्टी के छात्र द्वारा सूचित किया गया कि संस्थान में हम सभी छात्र सरस्वती पूजा के अवसर पर साउंड बॉक्स लगाये थे। स्थानीय 20 से अधिक असामाजिक तत्वों के द्वारा पारा मेडिकल संस्थान में जबरदस्ती घुस कर गाना बजाने को बोलने लगे जिस पर हम सभी छात्र गाना बजाने से मना किये। तो वे लोग हम सभी छात्रों के साथ गाली-गलौज करने लगे, गाली-गलौज देने से मना करने पर हमलोगो के साथ मारपीट करने लगा तथा बिल्डिंग के खिड़की के शीशा एवं गेट के शीशा को पत्थर एवं लाठी- डंडा से तोड़-फोड़ किया है। जिस हमले में दो-तीन छात्र जख्मी हो गए है। साथ ही असमाजिक लोगों के द्वारा हम लोगो को धमकी दिया गया है कि रामपट्टी में नहीं रहने देंगे। छात्रों के द्वारा उनमें से सात असामाजिक तत्वों को पहचान लिया गया है। जिसमें हीरा सहनी, पिता- नामालूम, रणवीर कुमार, विक्रम कुमार, संजय कुमार, दिलीप कुमार, विजय कुमार, गणेश कुमार, सभी पिता-नामालूम सभी गांव गोदीयारी थाना-राजनगर जिला- मधुबनी के द्वारा जबरदस्ती संस्थान में गाली-गलौज, मारपीट एवं तोड़-फोड़ किया है। उपरोक्त व्यक्तियों के द्वारा सरकारी संस्थान में घुसकर खिड़की के शीशा एवं दरवाजा के शीशा तोड़-फोड़ तथा सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाया गया। पुलिस सुचना मिलते ही पारा मेडिकल संस्थान पहूंची तो सभी लोग वहां से भाग निकले।
वही निरंजन कुमार ने थाना में दिए लिखित आवेदन के द्वारा पुलिस प्रशासन से निवेदन किया है कि उपरोक्त व्यक्तियों के विरुद्ध उचित कानूनी कार्रवाई किया जाय। पुलिस द्वारा संस्थान में लगे सी सी टी भी फूटेज को भी खंगाला जा रहा है। जिस से सभी असमाजिक तत्वों का सही से पहचान करने में सहुलियत हो।




