नवादा / सोनू सिंह ।
जिले में आयोजित केंद्रीय चयन पर्षद (सिपाही भर्ती) परीक्षा के दौरान कदाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है। नगर थाना में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार कन्हाई लाल साहू महाविद्यालय स्थित परीक्षा केंद्र पर परीक्षार्थियों तक चीट पहुंचाने, प्रश्नपत्र से संबंधित सूचनाओं के आदान-प्रदान तथा परीक्षा की गोपनीयता भंग करने का प्रयास किया गया।
केंद्राधीक्षक बाल्मिकी प्रसाद द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी के अनुसार परीक्षा के दौरान सूचना मिली कि कक्ष संख्या-01 के समीप एक युवक द्वारा बाहर से परीक्षार्थियों तक चीट पहुंचाई जा रही है। सूचना मिलने पर केंद्राधीक्षक एवं पुलिस पदाधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की।
प्राथमिकी में उल्लेख है कि घटनास्थल के पास से एक फटा हुआ चीट बरामद किया गया, जिस पर विभिन्न प्रश्नों के क्रमांक के सामने उत्तर विकल्प अंकित थे। इसके बाद केंद्र परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई, जिसमें कुछ व्यक्तियों की गतिविधियां संदिग्ध पाई गईं।
एफआईआर के अनुसार पुलिस द्वारा पूछताछ के दौरान कुछ लोगों को हिरासत में लेकर उनके मोबाइल फोन की जांच की गई। जांच में कई परीक्षार्थियों के नाम, रोल नंबर, प्रश्नपत्र सेट कोड एवं अन्य महत्वपूर्ण सूचनाओं से संबंधित तस्वीरें मिलने की बात सामने आई है।
प्राथमिकी में यह भी कहा गया है कि पूछताछ के दौरान परीक्षा केंद्र के बाहर मौजूद कुछ व्यक्तियों, बायोमैट्रिक कार्य में लगे कर्मियों तथा अन्य सहयोगियों के नाम सामने आए। इसके आधार पर पुलिस ने विभिन्न लोगों
विरुद्ध मामला दर्ज किया है।
नवादा नगर थाना SHO उमाशंकर सिंह का बयान:
नगर थाना में दर्ज प्राथमिकी में जैमर ऑपरेटर बिपिन कुमार, बायोमैट्रिक ठेकेदार रोहित कुमार उर्फ मुरारी, सहयोगी मनीष कुमार, बायोमैट्रिक कर्मी विकास कुमार व कुणाल कुमार, कथित मास्टरमाइंड रोशन कुमार, दो वीक्षक गुंजन कुमारी व शिक्षक अजीत कुमार सहित कुल 15 लोगों को नामजद किया गया है। वहीं 7 अभियुक्तों की गिरफ़्तारी की जा चुकी हैं जिनमे से 2 जुमेनाइल हैं इनमें सात परीक्षार्थी भी शामिल हैं।
पुलिस ने जैमर ऑपरेटर बिपिन कुमार तथा बायोमैट्रिक कर्मी मनीष कुमार और कुणाल कुमार को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। प्राथमिकी में कई मोबाइल फोन, सिम कार्ड, डिजिटल सामग्री एवं अन्य दस्तावेज जब्त किए जाने का उल्लेख किया गया है।
फिलहाल पुलिस जब्त डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर यह पता लगाने में जुटी है कि यह नेटवर्क कितना बड़ा था और परीक्षा से संबंधित सूचनाओं का आदान-प्रदान किस स्तर तक हुआ। मामले की जांच जारी है और जांच पूरी होने के बाद ही पूरे प्रकरण की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।




