रिपोर्टर — राजीव कुमार झा
– दर्द से परेशान इलाज कराने गए मरीज को डाक्टर नही मिलने पर हुआ खुलासा, ड्यूटी पर नहीं आते डाक्टर
फर्जी बारे कर बनाते रहे हैं हाजरी
जांच में दोषी पाए जाने पर होगी कड़ी कार्रवाई सिविल सर्जन
– मधुबनी जिले के झंझारपुर अनुमंडल क्षेत्र के विभिन्न अखबार के हेड लाइन में अक्सर सुर्खियों में छाए रहने वाला ट्रामा सेंटर अस्पताल एक बार फिर से विवाद में है। ट्रामा सेंटर अस्पताल के डॉक्टर मनीष कुमार ने 14 तारीख को ही 15 तारीख का हाजिरी एक दिन पूर्व एडवांस में ही बना लिया था। इतना ही नही ड्यूटी रजिस्टर में 11,12,13 और 14 तारीख को हस्ताक्षर वाला कॉलम खाली पडा़ था। वहीं अस्पताल के प्रभारी डॉक्टर अशोक आनंद 14 तारीख को दिन में ड्यूटी करने के बाद ड्यूटी रजिस्टर में अपना हाजिरी बनाकर चले गए थे। ताकि खाली हस्ताक्षर वाला कॉलम मेंं जब डॉक्टर आएंगे तो वे अपना हाजिरी बना लेंगे। इस बात का खुलासा तब हुआ जब 14 तारीख यानी बुधवार की देर रात 10 बजे दर्द और दस्त से परेशान अररिया संग्राम पंचायत के बेचन महतो को इंजीनियर प्रमोद कुशवाहा और मोहम्मद ईफ्तेखार डॉक्टर से दिखाने ट्रामा सेंटर अस्पताल लेकर आया तो मुख्य गेंट में ताला जड़ा हुआ था। जोर-जोर से आवाज लगाने पर काफी देर बाद गार्ड आकर गेट खोला। मरीज के साथ जब अंदर गए तो अस्पताल में डॉक्टर नहीं था। रात में प्रभारी डॉक्टर अशोक आनंद का ड्यूटी था लेकिन वे ड्यूटी से नदारद थे। इधर दर्द और दस्त से मरीज छटपटा और कराहता रहा। लेकिन उसे इलाज करने वाला उपलब्ध नहीं था। प्रमोद कुशवाहा ने डॉक्टर का ड्यूटी रजिस्टर दिखाने को कहा तो बताया गया कि रजिस्टर बंद है कल दिखाया जाएगा। काफी देर तक जीएनएम अमर सिंह माली से बहस हुआ फिर जाकर पत्रकार को बुलाया गया। जब पत्रकार वहां पहुंचे तो प्रभारी से बात किया गया। उन्होंने ड्यूटी रजिस्टर दिखाने को कहा लेकिन जीएनएम प्रकाश सिंह माली काफी मशक्कत के बाद रजिस्टर दिखाया। डॉक्टर के ड्यूटी रजिस्टर में डॉक्टर मनीष कुमार 14 तारीख को ही 15 तारीख का हाजिरी बना लिया था। जिसे देखते ही दिमाग हिल गया। इतना ही नहीं 11,12,13 और 14 तारीख को हाजिरी वाला कॉलम खाली पडा़ था। रजिस्टर का फोटो और वीडियो बनाने के बाद जिला पदाधिकारी, सिविल सर्जन, एसडीओ झंझारपुर,थाना और अस्पताल के प्रभारी को फोन किया गया देर रात होने के कारण किसी ने भी फोन नहीं उठाया। इस बात को लेकर ट्रामा सेंटर अस्पताल का वीडियो काफी तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वही मैरिज के परिजनों ने ट्रामा सेंटर अस्पताल के डॉक्टर पर बडा़ आरोप लगाया है। परिजनों ने बताया कि ट्रामा सेंटर अस्पताल ड्रामा बनकर रह गया है। जीएनएम अमर सिंह माली और ड्रेसर सुरेंद्र कुमार दोनों सरकार से रूम रेंट का पैसा लेते हैं इसके बावजूद भी दोंनो अवैध रूप से अस्पताल को ही आवासीय बनाकर रह रहा है और यहीं लोग मिलकर हेराफेरी करवाता है। चुकी डॉक्टर और जीएनएम से इन दिनों को पैसा मिलती है।
परिजनों ने आगे कहा कि यदि दोषी डॉक्टरों और कर्मियों को सस्पेंड नहीं किया गया तो मुख्यमंत्री के जनता दरबार में जाकर शिकायत करेंगे।
इस बात को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता इंजीनियर प्रमोद कुशवाहा ने कहा है कि जब से ट्रामा सेंटर अस्पताल फंक्शन में आया है अस्पताल के डाक्टर और नर्स नदारद रहते हैं। इतना ही नहीं एक दूसरे का हाजिरी भी बनाने का आरोप लगता रहा है। हद तो तब हो गई जब रात में मरीज को दिखाने गए थे। ड्यूटी रजिस्टर देख स्तब्ध रह गया। डॉक्टर मनीष कुमार ने 14 तारीख को ही 15 तारीख का हाजिरी बना लिया था। इतना ही नहीं 4 दिन पीछे का हाजिरी खाली पडा़ था। इतना बड़ा धोखाधड़ी आखिर एक डॉक्टर ही कर सकता है। कानून के नजर में इससे जघन्य अपराध हो ही नहीं सकता। ऐसे में यदि डॉक्टर मनीष कुमार बडा़ अपराध भी करता तो कोर्ट में साबित कर देता कि मैं ड्यूटी पर था। इससे बडा़ जघन्य अपराध हो नहीं सकता। लोगों के जिंदगी के साथ ये लोग खिलबाड़ करते हैं। इस खेल में शामिल सभी डाक्टर,जीएनएम और कर्मियों को सस्पेंड किया जाए ताकि दूसरे डॉक्टर ऐसा करने का हिमाकत नहीं कर सके।
इस मामले को लेकर सिविल सर्जन डॉक्टर नरेश कुमार भिंसरिया ने बताया कि घटना की जानकारी हुई है जांच टीम गठित कर दोषी पाए जाने पर कडी़ कारवाई की जाएगी।




