रिपोर्ट- निभाष मोदी!
खरीक, भागलपुर 22 जनवरी 2024
संविधान बचाओ-देश बचाओ अभियान के तहत आज खरीक प्रखंड के विश्वकर्मा चौक से ऊर्दू चौक तक रैली निकाली गई। रैली में शामिल लोगों ने संविधान बचाओ देश बचाओ नारा के साथ-साथ केन्द्र की मोदी सरकार के मनुवादी-सांप्रदायिक-कॉरपोरेट ऐजेंडा के विरुद्ध भी नारे लगाए। जिसमें “डॉ अंबेडकर के विचारों की रौशनी में आगे बढ़ो!”
“जननायक कर्पूरी ठाकुर के सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष की विरासत को बुलंद करो!”

“मनुवाद व कॉरपोरेट दलाल नरेन्द्र मोदी – मुर्दाबाद!”
“सवर्ण आरक्षण और संविधान संशोधन हमें कतई कबूल नहीं!”
“मनु-विधान व सवर्ण वर्चस्व थोपने के खिलाफ संविधान व सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष तेज करो!”
रैली का नेतृत्व कर रहे सामाजिक न्याय आंदोलन, बिहार के गौतम कुमार प्रीतम व राजेश पंडित ने कहा आर्थिक आधार पर सवर्ण आरक्षण के जरिये संविधान, सामाजिक न्याय व बहुजनों पर बड़ा हमला बोला गया है. सवर्ण आरक्षण को लागू करने और संविधान संशोधन के जरिए संविधान की मूल संरचना व वैचारिक आधार पर हमला किया गया है. सामाजिक न्याय व आरक्षण की अवधारणा को निशाने पर लिया गया है. यह खतरनाक है. दलितों-आदिवासियों-पिछड़ों के आरक्षण के खात्मे का रास्ता खुल गया है.संविधान व सामाजिक न्याय पर इस दौर के इस बड़े हमले को कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है. नरेन्द्र मोदी सरकार ने RSS के संविधान बदलने की योजना के एक पैकेज को अमलीजामा पहनाया है. RSS का संविधान व आरक्षण से नफरत जगजाहिर है.
रैली को संबोधित करने आए सामाजिक न्याय आंदोलन, बिहार के संरक्षक डॉ.विलक्षण बौद्ध ने कहा आरक्षण कोई गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम नहीं है, न ही रोजगार की गारंटी से जुड़ा मामला है. यह तो ऐतिहासिक वंचना,भेद-भाव के शिकार समाज के दलित-पिछड़े हिस्सों के सत्ता व शासन की संस्थाओं में प्रतिनिधित्व-भागीदारी की गारंटी से जुड़ा हुआ है. आरक्षण का आधार सामाजिक-शैक्षणिक पिछड़ापन है.आज भी आंकड़े कह रहे हैं कि आबादी के अनुपात में सत्ता व शासन की संस्थाओं-विभिन्न क्षेत्रों में दलितों-आदिवासियों व पिछड़ों का प्रतिनिधित्व काफी कम है. केन्द्र सरकार की ग्रुप A की नौकरियों में सवर्ण- 74.48%, OBC-8.37%, SC-12.06% हैं. देश के 496 विश्वविद्यालयों के कुलपतियों में 448सवर्ण हैं.43केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में 95 प्रतिशत प्रोफेसर,92.9 प्रतिशत एसोसिएट प्रोफेसर,66.27 प्रतिशत असिस्टेंट प्रोफेसर सवर्ण हैं.52प्रतिशत ओबीसी के प्रोफेसर व एसोसिएट प्रोफेसर शून्य हैं.न्यायपालिका व मीडिया में भी दलितों-आदिवासियों-पिछड़ों की भागीदारी अभी भी गिनने लायक नहीं है. शासन-सत्ता की विभिन्न संस्थाओं व विभिन्न क्षेत्रों में सवर्णों की मौजूदगी आबादी के अनुपात में कई गुणा ज्यादा है. फिर भी आरक्षण सवर्णों को दिया जा रहा है.
सवर्णों को आरक्षण देने का साफ मतलब है, दलितों-आदिवासियों-पिछड़ों के आरक्षण को प्रभावहीन बना देना, खत्म करना।
सभा को संबोधित किया पृथ्वी शर्मा, निर्भय कुमार, नसीब रविदास, अशोक अंबेडकर, पाण्डव शर्मा, धर्मेन्द्र मंडल।
रैली में मौजूद थे विकास मंडल, अमरेंद्र पंडित, दशरथ ठाकुर, रूपक यादव भारती, बद्री राम सहित कई एक।
राजेश पंडित द्वारा जारी





