रिपोर्ट: अनमोल कुमार

पटना। जनकवि बाबा नागार्जुन की 110 वीं जयंती पर संझाबाती पत्रिका एवं बिहार केसरी श्री बाबू पुस्तकालय द्वारा बाढ़ के अचुआरा गाँव में पुष्पांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पत्रिका के संपादक सह कवि-कथाकार हेमंत कुमार ने नागार्जुन को कबीर और निराला परंपरा का अक्खड़ व फक्कड़ कवि बताते हुए कहा कि वे साधु स्वभाव के यायावर कवि थे।

बाबा ने कविता को मखमली सेज और रंगमहल से निकालकर खेत- खलिहान तथा कल- कारखाने तक ले गए। उनकी रचनाओं में किसान- मजदूरों के पसीने की महक और आम आदमी की जिजीविषा का जीवंत चित्रण हुआ है। मौके पर रामदेव शर्मा “प्रभंजन”, राजकिशोर उन्मुक्त, युवा समाजसेवी सौरव सिंह सोलंकी, डा० रामाश्रय झा,जैनेन्द्र प्रसाद “रवि”, चंदन कुमार, आरपी निराला, आनंद शंकर, पं० बालकृष्ण उपाध्याय, फणीभूषण, हर्ष राज एवं किशन कुमार आदि ने भी अपने भावोद्गार व्यक्त किये। कार्यक्रम के अंत में लघुकथा आंदोलन के सशक्त हस्ताक्षर डा० सतीशराज पुष्करणा एवं हिंदी व मगही के वरिष्ठ कवि केशव प्रसाद वर्मा के असामयिक निधन पर दो घड़ी का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति और सद्गति हेतु भगवान से प्रार्थना की गई।




