एसवीपी कॉलेज में आयोजित हुआ आत्म दीपो भव आनंद क्लब!

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कैमूर/भभुआ(ब्रजेश दुबे):

भभुआ शहर के सरदार वल्लभ भाई पटेल महाविद्यालय भभुआ के मनोविज्ञान विभाग एवं दर्शनशास्त्र विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आत्म दीपो भव आनंद क्लब का उद्घाटन सत्र महाविद्यालय के कक्ष संख्या 11 में 11 बजे शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मंचासीन अतिथियों द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा पर फूल माला एवं पुष्प अर्पित कर तथा दीप प्रज्वलित कर किया गया। डॉ सोनल विभागाध्यक्ष दर्शनशास्त्र विभाग ने कार्यक्रम का संक्षिप्त परिचय देते हुए सच्चिदानंद की बहुत सुंदर व्याख्या प्रस्तुत की ।कार्यक्रम की शुरुआत करने से पूर्व मंचासीन अतिथियों को माल्यार्पण एवं पौध गमला देकर सम्मानित किया गया। मंचासीन अतिथियों में श्री सुशील करोलिया नेहरू युवा केंद्र का सम्मान डॉक्टर नेयाज अहमद सिद्दीकी द्वारा, डॉक्टर त्रिवेणी नाथ पांडे पूर्व प्रधानाचार्य का सम्मान डॉ बंशीधर उपाध्याय द्वारा, डॉ ब्रह्मदेव सिंह पूर्व विभागाध्यक्ष इतिहास विभाग का सम्मान डॉक्टर महेश प्रसाद द्वारा, डॉक्टर कमला सिंह पूर्व विभागाध्यक्ष राजनीति विज्ञान विभाग का सम्मान डॉक्टर सीमा सिंह द्वारा, डॉ सीमा पटेल विभागाध्यक्ष इतिहास विभाग का सम्मान डॉ सोनल द्वारा तथा प्रोफेसर जगजीत सिंह विभागाध्यक्ष अर्थशास्त्र विभाग का सम्मान बृजराज प्रसाद गुप्त द्वारा किया गया।
कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए इस कार्यक्रम की संयोजक डॉक्टर सीमा सिंह विभागाध्यक्ष मनोविज्ञान विभाग ने आज के कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए खुशहाल जीवन के लिए आवश्यक तत्वों पर प्रकाश डाला। उन्होंने आगे बताया कि आत्मा दीपो भव आनंद क्लब के अंतर्गत सकारात्मक संवाद, मनोरथ, आनंद प्रयोगशाला, समग्र रूपांतरण, आत्मबोध एवं जीवन कौशल का परामर्श एवं प्रशिक्षण मनोचिकित्सा एवं न्यूरो लिंग्विस्टिक प्रोग्रामिंग की विभिन्न तकनीकों द्वारा किया जाएगा उन्होंने आनंद क्लब की गतिविधियों के विविध आयामों की चर्चा की जिसके 6 सोपान पूर्ण होने के पश्चात प्प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने क्लब के संचालन हेतु सभी के सहयोग की अपेक्षा की। युवा केंद्र के जिला युवा पदाधिकारी श्री सुशील करोलिया ने अपने संबोधन में युवाओं में सकारात्मक विचारों के संचार करने हेतु सभी को आनंद क्लब से जोड़ने का आह्वान किया।
कार्यक्र में मौजद रही डॉक्टर कमला सिंह मैडम ने कहा कि आनंद क्लब के विकास के लिए वह हर संभव सहयोग के लिए हमेशा उपस्थित रहेंगे। डॉक्टर त्रिवेणी नाथ पांडे ने आनंद क्लब की उपयोगिता एवं प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मनोविज्ञान एवं दर्शनशास्त्र विभाग के संयुक्त प्रयास से संचालित कार्यक्रम दोनों विषयों के मध्य अंतर्संबंध को रेखांकित करता है दर्शनशास्त्र से ही अन्य विषयों की उत्पत्ति होने की बात उन्होंने उद्घाटित किया। दर्शनशास्त्र ही परिकल्पना एवं सिद्धांतों के प्रतिपादन का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने जीवन के चार सूत्रों को बताया जो प्राप्त है वह पर्याप्त है, वर्तमान में जीना सीखो, सकारात्मक रहो, विधि के विधान में विश्वास करो। इन चार सूत्रों को अपनाकर आनंद प्राप्ति की ओर उन्मुख हुआ जा सकता है। उन्होंने कहा कि जीवन अनंत यात्रा है मंजिल महत्वपूर्ण है परंतु सफर का भी अपना आनंद है। उन्होंने एक आध्यात्मिक गीत के माध्यम से जीवन में आनंद के मर्म को दार्शनिक अंदाज में बताया।
बैठक में डॉक्टर सीमा सिंह द्वारा हु एम आई मैं’ कौन हूं’ से संबंधित क्रिया जोकि न्यूरो लिंग्विस्टिक प्रोग्रामिंग पर आधारित थी उसे बड़ी खूबसूरत ढंग से कराते हुए कोअहम से सोअहम की यात्रा कराया। इस क्रिया से अपनी पूर्णता प्रकाशयता एवं विस्तारित आत्म दर्शन की अनुभूति कुछ क्षणों में ही प्राप्त हुई यह बहुत ही प्रभावशाली तकनीक थी। डॉ ब्रह्मदेव सिंह ने आत्म दीपो भव क्लब पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हमारे अंदर हमेशा वार्तालाप चलता रहता है इससे मुक्त होकर ही आत्म साक्षात्कार की ओर अग्रसर हो सकते हैं उन्होंने कहा कि मैं इस क्लब से जुड़ना चाहता हूं। महाविद्यालय के प्राचार्य ने अपने वक्तव्य में कहा कि आज समाज भौतिकता में लिप्त है यदि इससे छुटकारा पा लिया जाए तो वास्तव में आनंद की प्राप्ति किया जा सकता है । इच्छाओं को कम करके संतोष पूर्ण जीवन जीने की कला को उन्होंने स्पष्ट किया।
डॉ नेयाज अहमद सिद्दीकी मनोविज्ञान विभाग ने धन्यवाद ज्ञापन देते हुए कहां की मधुबन खुशबू देता है यह जीवन उसका जीवन है जो औरों को जीवन देता है। उन्होंने मंचासीन सभी अतिथियों प्राध्यापकों शिक्षकेतर कर्मचारियों अतिथि शिक्षकों बीसीए विभाग के शिक्षकों एवं उपस्थित छात्र छात्राओं को कार्यक्रम में उपस्थित एवं सहभागी होने तथा इसे सफल बनाने हेतु सहयोग के लिए अपने हृदय की गहराइयों से धन्यवाद दिया। उन्होंने आनंद क्लब का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण करते हुए कहा कि मन के नकारात्मक विचारों से मुक्ति का मार्ग अपनाकर जीवन में आनंद की प्राप्ति की जा सकती है। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में उपस्थित प्राध्यापकों में डॉक्टर सुमित कुमार राय, श्री केश्वर भारती, डॉ राजकुमार गुप्ता, डॉ माया सिन्हा, डॉ आनंद प्रकाश, डॉ रविंद्र कुमार, डॉ सैयद असद करीम, डॉ बंशीधर उपाध्याय, डॉक्टर सौरभ विक्रम,, डॉ मुकेश कुमार,, डॉक्टर सोमेश,, सी राजेश ठाकुर,, डॉक्टर धनंजय कुमार,, डॉक्टर धनंजय प्रसाद राय,, राकेश कुमार,, डॉक्टर सुनील पंडित, रवि रंजन निलेश कुमार वर्मा,, डॉ अविनाश, डॉक्टर सीताराम पंडित, डॉ अभय कुमार द्विवेदी, आशुतोष कुमार सिंह,, अंगद पटेल, सोनल जी उपस्थित रहे। शिक्षकेतर कर्मचारियों में अवधेश कुमार, प्रतिभा, कंचन कुमारी आदि की उपस्थिति रही। हमारे स्वयंसेवक शिवम कुमार, अभय, विश।ल कुमार, ओम प्रकाश, अंकित, अनन्या पाठक, मंगलम आदि ने इस कार्यक्रम को सफल बनाने में सराहनीय योगदान दिया। आसिफ एवं बहुत से बीसीए विभाग के छात्र छात्राओं ने अपनी सहभागिता एवं सहयोग दिया।

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