फिर चरवाहा विद्यालय के रास्ते पर लौट रहा बिहार- विजय कुमार सिन्हा

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रवि शंकर शर्मा :-

ध्वस्त शिक्षा व्यवस्था को रसातल में ले जाने के लिए महागठबंधन सरकार कृत्संकलिप्त- विजय कुमार सिन्हा

स्कूली बच्चों एवं शिक्षकों के भविष्य के साथ सरकार कर रही है खिलवाड़-विजय कुमार सिन्हा

चरवाहा विद्यालय के रास्ते पर लौट रहा बिहार,

बडे़ भाई और छोटे भाई के पास तीन दशक से अधिक से है शिक्षा विभाग, बदहाल क्यों, जिम्मेवार कौन?

पटना, 19अप्रैल2023

भाजपा विधान मंडल दल के नेता श्री विजय कुमार सिन्हा ने सरकारी स्कूल के सीनियर छात्रों द्वारा जूनियर कक्षा के बच्चों को पढ़ाने के निर्णय पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार स्कूली बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। बुधवार को भाजपा कार्यालय में जन कल्याण संवाद कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बात करते हुए श्री सिन्हा ने उक्त बातें कहीं।

नेता प्रतिपक्ष श्री सिन्हा ने कहा की पटना, लखीसराय, रोहतास सहित विभिन्न जिलों में जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा आदेश जारी किया गया है कि विद्यालय के शिक्षकों को जातिगत जनगणना कार्य में प्रतिनियुक्त किए जाने के कारण अब वरीय कक्षा के छात्र कनीय कक्षाओं के छात्र को पढ़ाने का कार्य करेंगे। यह आदेश न सिर्फ कनीय कक्षा के छात्रों को अच्छी शिक्षा से वंचित रखना है अपितु वरीय कक्षा के छात्र भी अपनी कक्षा की पढ़ाई नहीं कर पाएंगे।राज्य में शिक्षक के अलावा लाखों कर्मचारी हैं जिससे सरकार जातिगत जनगणना का कार्य करा सकती है।

श्री सिन्हा ने कहा कि 90 के दशक में श्रीमान लालू प्रसाद जी चरवाहा विद्यालय की स्थापना कर बिहार की शिक्षा व्यवस्था का क्षरण शुरू कर दिया था। भाजपा के सहयोग से 2005 में जब नीतीश कुमार ने शासन व्यवस्था संभाला तो पूर्व से ध्वस्त शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने का प्रयास किया गया। लेकिन बिहार एक बार फिर से चरवाहा विद्यालय की ओर लौट रहा है। तीन दशक से अधिक समय से बड़े भाई छोटे भाई के पास शिक्षा विभाग रहा है। लेकिन कोई सुधार नहीं हो रहा है। सरकार को इसका जबाब देना चाहिए। विद्यालय का भवन नहीं है बच्चे खुले आसमान के नीचे पढ़े रहे है। शिक्षकों की भारी कमी है। विद्यालयों में शौचालय नहीं है। नियोजन माध्यम से नियुक्त शिक्षकों के साथ खेल खेला जा रहा है। शिक्षा मंत्री दूसरी दूनिया में मस्त है।

श्री सिन्हा ने कहा कि बिहार एकमात्र राज्य है जहां जिस कार्य के लिए जो सरकारी कर्मचारी नियुक्त किए गए हैं उनसे वह काम नहीं लिया जाता है। पुलिस का काम अपराधियों को पकड़ने का है यह उनसे दारू पकड़वा रहे हैं। दारू पकड़ने के लिए मौजूद आबकारी पुलिस से ऑफिस का काम लिया जा रहा है। पंचायती राज विभाग के कर्मियों का काम पंचायत व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने का है।यह उनसे ठेकेदारी का काम करा रहे हैं। शिक्षकों का काम बच्चों को पढ़ाने का है। लेकिन उनसे कहीं ड्राइवरी का काम तो कहीं जात गिनने में लगा रहे हैं।

श्री सिन्हा ने कहा कि शिक्षा में उपलब्धि गिनाने के लिए सरकार के पास कुछ भी नहीं है। एक रिर्पोट के अनुसार 5 वीं कक्षा के सरकारी स्कूल का छात्र तीसरी कक्षा का किताब अच्छा से नहीं पढ़ सकता है। गणित विषय में भी छठी कक्षा का छात्र चौथी कक्षा गणित नहीं हल कर पाता है। इन कमियों के पीछे सरकार द्वारा शिक्षकों को शिक्षण कार्य से मुक्त करा कर अन्य कार्यो में लगाया जाना मुख्य कारण है।सरकार आकड़ों की बाजीगरी कर अपना पीठ थोकने का प्रयास करती है।लेकिन वास्तिवकता अलग है इससे बिहार की जनता वाकिफ है।

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