मुंगेर-पैरा 78 शिक्षकों का संवैधानिक अधिकार:राहुल देव सिंह!

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प्रिंस कुमार की रिपोर्ट

आगामी विधानसभा सत्र के बाद से होगा व्यापक आंदोलन:टीईटी शिक्षक संघ

निवर्तमान सरकार शिक्षा-शिक्षक के प्रति उदासीन:जिला सचिव संदीप कुमार

मुंगेर: टीईटी शिक्षक संघ के प्रदेश इकाई के द्वारा आयोजित राज्यस्तरीय टीईटी शिक्षक सम्मेलन सह विचार संगोष्ठी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए शिक्षकों के प्रति सरकार का साकारात्मक दृष्टिकोण पर विशेष परिचर्चा सह समागम जगजीवन राम संसदीय अध्ययन एवं राजनीतिक शोध संस्थान,पटना में आयोजन किया गया।समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में कांग्रेस के विधान पार्षद समीर कुमार सिंह एवं बिहार प्रदेश कांग्रेस रिसर्च एवं मेनिफेस्टो कमिटि के चेयरमैन आनंद माधव उपस्थित थे।

टीईटी शिक्षक संघ के प्रमंडलीय संयोजक सह जिलाध्यक्ष राहुल देव सिंह ने जिला के शिक्षकों के साथ नेतृत्व करते हुए ज्वलन्त समस्याओ को प्रखरता से उठाते हुए निवर्तमान सरकार के सहयोगी को पूर्व में हुए विधानसभा चुनाव में शिक्षकों के लिये चुनावी घोषणापत्र में शामिल किये गये वादों की याद दिलाते हुए कहा कि माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा न्यायादेश में पारित पैरा 78 का अबतक शिक्षक हितार्थ लागु नही होने से शिक्षकों के संवैधानिक अधिकार का हनन हो रहा है।शिक्षकों को उनका संवैधानिक अधिकार प्रदान किये बगैर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की परिकल्पना बेमकसद एवं बेमानी है।

शिक्षक नेता प्रशांत कुमार यादव एवं जिला संयोजक राकेश कुमार यादव ने टीईटी शिक्षकों को और अत्यधिक संगठित होकर जिला से लेकर राज्य स्तर तक शिक्षकों के साथ हो रहे अमानवीय शोषण के खिलाफ प्रखरता से अपने वक्तव्य को राज्य के विभिन्न जिलों से आये टीईटी शिक्षकों के समक्ष रखा।जिला सचिव संदीप कुमार एवं उपाध्यक्ष रविकांत यादव ने अपने संबोधन में कहा कि आगामी फरवरी में होने वाले विधानसभा सत्र में टीईटी शिक्षकों को संवैधानिक अधिकार पैरा 78,राज्यकर्मी का दर्जा प्रदान नही करती है तो जिलास्तर से राज्यस्तर पैमाने पर समूचे बिहार में मुखर होकर प्रखरता से टीईटी शिक्षक संघ आंदोलन का शंखनाद कर सरकार के खिलाफ सङक से सदन तक संघर्ष करेगी।

इधर कांग्रेस विधान परिषद समीर कुमार सिंह ने टीईटी शिक्षकों के सभी ज्वलन्त चिर-प्रतीक्षित लंबित समस्याओ को सुनकर कहा की समाज के अंतिम पायदान पर रह रहे किसान एवं अभिवंचित वर्ग के बच्चे सरकारी विद्यालय में पढने आते है।ऐसे में सरकार के द्वारा शिक्षकों की अनदेखी एवं उपेक्षापूर्ण रवैया से बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना शिक्षकों के लिए चुनौती से कम नही है।उन्होने आश्वस्त किया कि आगामी विधान सभा सत्र में टीईटी शिक्षकों के समस्याओं को पुरजोर तरीके उठाकर शिक्षकों के संवैधानिक अधिकार को प्रदान करने के लिए सरकार को विवश करेगें।

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