अटल जी ने राष्ट्रधर्म को हमेशा दलगत राजनीति से ऊपर रखा : पूर्व राष्ट्रपति कोविंद!

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रिपोर्ट अनमोल कुमार

पूर्व राष्ट्रपति ने कहा-सुशासन, सामाजिक सशक्तिकरण व समरसता अटल जी का जीवन दर्शन था

नई दिल्ली : पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जन्मतिथि (सुशासन दिवस) की पूर्व संध्या पर आयोजित पांचवीं अटल बिहारी वाजपेयी स्मृति व्याख्यानमाला में पूर्व राष्ट्रपति राजनाथ कोविन्द ने कहा कि सुशासन और सामाजिक सशक्तिकरण और समरसता अटल जी का जीवन दर्शन था। उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता जताई कि देश का वर्तमान नेतृत्व अटल बिहारी के पदचिन्हों पर ही चल रहा है। इंडिया फाउंडेशन द्वारा इंडिया हैबिटेट सेंटर में ‘सुशासन के माध्यम से सामाजिक सशक्तिकरण : वाजपेयी की शैली में’ विषय पर आयोजित व्याख्यानमाला में मुख्य वक्ता रामनाथ कोविन्द ने कहा कि यह विषय हमेशा प्रासंगिक रहेगा।
कोविंद ने कहा कि अटल जी अन्त्योदय के दर्शन को कार्यरूप देने में विश्वास रखते थे। समाज के गरीब और वंचित वर्ग के लिए चिंतित व सक्रिय रहते थे। एक जनसेवक, राजनेता और प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने देश को जो दिया, उसे एक व्याख्यान में समेटा नहीं जा सकता। सुशासन तो उसका मात्र एक आयाम है।
मुझ पर अटल जी का व्यापक प्रभाव
पूर्व राष्ट्रपति कोविंद ने अटल बिहारी वाजपेयी को सार्वजनिक जीवन की पाठशाला बताते हुए पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि मुझ पर भी अटल जी का व्यापक प्रभाव था। उनके विचारों ने ही जनसेवा के लिए प्रेरित किया। कुछ प्रसंग सुनाते हुए बोले कि राष्ट्रधर्म को अटल जी ने हमेशा दलगत राजनीति से ऊपर रखा। समानता और सामाजिक समरसता के प्रति वह तन-मन-धन से समर्पित थे।
उन्होंने कहा कि बाबा साहेब डा. भीमराव आंबेडकर के प्रति अटल जी मन में अगाध श्रद्धा थी। वाजपेयी के कार्यकाल में ही संसद में बाबा साहेब का पोट्रेट लगा। अलग से अनुसूचित जनजाति आयोग गठित हुआ। उड़ीसा के गरीबों के लिए सात सूत्रीय गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम बना। सामाजिक समरसता और सशक्तिकरण के लिए अटल जी ने दूरदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ कई ऐतिहासिक निर्णय लिए। उन्होंने कहा कि अटल जी का सुशासन सिर्फ सरकारी कामकाज में नहीं, बल्कि पार्टी संगठन में भी सुशासन की पद्धति को अपनाते थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उन्हीं के पदचिन्हों पर चल रहे हैं।

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